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दून स्मार्ट सिटी परियोजना में भारी गड़बड़ी, बिना टेंडर करोड़ों के काम, कैग रिपोर्ट में खुलासा

देहरादून: केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत चल रही देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड परियोजना में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में सामने आया है कि परियोजना के तहत कई काम बिना टेंडर के कराए गए और करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी भी पाई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार स्मार्ट सिटी मिशन के तहत वर्ष 2017 में देहरादून को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए चुना गया था। कैग ने वर्ष 2018 से 2023 के बीच परियोजना के तहत किए गए कार्यों का ऑडिट किया, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं।

बिना टेंडर के कराए गए काम

कैग रिपोर्ट के मुताबिक परियोजना में लगभग 2.93 करोड़ रुपये के कार्य बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए कराए गए। इसके अलावा Bridge and Roof Company (India) Limited के साथ स्मार्ट रोड, सीवरेज और ड्रेनेज कार्यों के लिए समझौता किया गया था, लेकिन कार्यों में देरी और लापरवाही के कारण सितंबर 2022 में कंपनी के साथ किया गया एमओयू समाप्त कर दिया गया।

इस परियोजना के लिए कंपनी को 76.84 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। हालांकि एमओयू समाप्त होने तक कंपनी 57.78 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी थी, लेकिन 19.06 करोड़ रुपये की शेष राशि की वसूली नहीं की गई, जिस पर कैग ने सवाल उठाए हैं।

ठेकेदारों पर जुर्माना भी नहीं वसूला

कैग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में देरी होने पर ठेकेदारों से जुर्माना वसूलने का प्रावधान था, लेकिन कई मामलों में यह कार्रवाई नहीं की गई।

उदाहरण के तौर पर परेड ग्राउंड के जीर्णोद्धार के लिए अक्टूबर 2019 में 18.92 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया था। यह कार्य अक्टूबर 2020 तक पूरा होना था, लेकिन फरवरी 2023 तक भी पूरा नहीं हो पाया। ऐसे में ठेकेदार से 1.41 करोड़ रुपये का अर्थदंड वसूला जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया।

कई परियोजनाएं बनी शोपीस

कैग ऑडिट में पाया गया कि स्मार्ट सिटी की कई परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं हो पाया।

  • ठोस कचरा प्रबंधन की निगरानी के लिए 55 करोड़ रुपये की लागत से बायोमीट्रिक और सेंसर प्रणाली विकसित की गई, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।
  • स्मार्ट अपशिष्ट वाहन योजना के तहत 90 लाख रुपये खर्च कर ई-रिक्शा खरीदे गए, लेकिन दो साल तक उनका संचालन नहीं हुआ।
  • मौसम की जानकारी के लिए 06 करोड़ रुपये के पर्यावरण सेंसर लगाए गए, लेकिन उनका उपयोग नहीं हुआ।
  • मल्टी यूटिलिटी डक्ट परियोजना पर 24 करोड़ रुपये खर्च किए गए, पर इसका भी उपयोग नहीं किया गया।

स्मार्ट स्कूल परियोजना भी ठप

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर के तीन सरकारी स्कूलों में 5.91 करोड़ रुपये की लागत से प्रोजेक्टर, ई-कंटेंट, इंटरएक्टिव बोर्ड, कंप्यूटर लैब, सीसीटीवी और बायोमेट्रिक सिस्टम लगाए गए, लेकिन अत्यधिक बिजली बिल आने के कारण इन उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हो पाया।

अन्य वित्तीय अनियमितताएं भी सामने आईं

कैग रिपोर्ट के अनुसार:

  • मॉडर्न दून लाइब्रेरी परियोजना में 70 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ।
  • चकराता रोड पर स्मार्ट रोड परियोजना में 47 करोड़ रुपये का अनियमित व्यय पाया गया।
  • दो करेंट खातों में राशि जमा रखने से 2 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ।

कैग की रिपोर्ट सामने आने के बाद देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना के कार्यों और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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Author: nirbhiknazar

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