देहरादून। उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने इस वर्ष कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। यात्रा वर्ष 2026-27 के लिए समिति ने 121 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित व्यय स्वीकृत किया है।
इस वर्ष चारधाम यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 19 अप्रैल से होगी। इसी दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इसके बाद केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल तथा बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को दर्शन के लिए खुलेंगे।
मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि इस बार यात्रा को अधिक अनुशासित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए कुछ विशेष निर्णय लिए गए हैं। मंदिर परिसर के एक सीमित दायरे में चित्रांकन करने वाले लोगों और यात्रा का प्रसारण करने वालों के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी। इसके साथ ही मंदिर परिसर में दूरभाष यंत्र और चित्र लेने वाले उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
समिति की ओर से मंदिर परिसर के बाहर श्रद्धालुओं के लिए विशेष कक्ष बनाए जाएंगे, जहां सभी लोग अपने दूरभाष यंत्र और अन्य उपकरण सुरक्षित रख सकेंगे। मंदिर के गर्भगृह में किसी को भी दूरभाष ले जाने की अनुमति नहीं होगी। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वह स्वयं भी इस नियम का पालन करते हुए गर्भगृह में दूरभाष नहीं ले जाएंगे।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग तीर्थ यात्रा और सामान्य भ्रमण को एक समान मान लेते हैं, जबकि दोनों में स्पष्ट अंतर है। इसलिए यात्रा की गरिमा और धार्मिक वातावरण को बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था की जा रही है।
इसी के साथ तीर्थ पुरोहितों के हितों को ध्यान में रखते हुए तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष स्थापित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया है। इसके अलावा मंदिर परिसर की रेलिंग की मरम्मत, रंग-रोगन, पूजा व्यवस्था को और व्यवस्थित बनाने तथा आधिकारिक जाल पृष्ठ को बेहतर बनाने की दिशा में भी कार्य किए जाएंगे।
चारधाम यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं में इस बार काफी उत्साह देखा जा रहा है। 6 मार्च से 16 मार्च के बीच मात्र दो सप्ताह में 6 लाख 17 हजार 853 से अधिक श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। इनमें केदारनाथ धाम के लिए 2 लाख 6 हजार से अधिक, बदरीनाथ धाम के लिए 1 लाख 82 हजार से अधिक, गंगोत्री धाम के लिए 1 लाख 15 हजार से अधिक और यमुनोत्री धाम के लिए 1 लाख 13 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हैं।
वहीं शीतकालीन यात्रा के दौरान भी श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या देखने को मिली। 16 मार्च 2026 तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शीतकालीन पूजा स्थलों पर दर्शन किए। बदरीनाथ के शीतकालीन स्थल योग बदरी पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर जोशीमठ में 20 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि केदारनाथ की शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में 31 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
समिति का कहना है कि यात्रा आरंभ होने से पहले सभी तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूरी कर ली जाएंगी, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन का अनुभव मिल सके।