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राजस्व लोक अदालत का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया शुभारंभ, लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

देहरादून: उत्तराखंड में न्याय व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने राजस्व लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राजस्व मामलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश देते हुए कहा कि आम जनता को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व लोक अदालत का आयोजन वर्षों से लंबित राजस्व विवादों के त्वरित और सार्थक समाधान के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े विवाद केवल कागजी प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि इनके पीछे किसानों की भूमि, परिवारों की आजीविका और लोगों का आत्मसम्मान जुड़ा होता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में राजस्व विवादों के निस्तारण के लिए राज्य स्तर पर राजस्व परिषद, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त न्यायालय, जिला स्तर पर कलेक्टर न्यायालय तथा तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार न्यायालय कार्यरत हैं। वर्तमान में प्रदेश में 400 से अधिक राजस्व न्यायालय संचालित हैं, जिनमें लगभग 50 हजार से अधिक मामले लंबित हैं।

इन समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार ने सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण और संतुष्टि के मूल मंत्र के साथ राजस्व लोक अदालत की पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि “न्याय आपके द्वार” की अवधारणा के तहत प्रदेश के सभी 13 जिलों में 210 स्थानों पर एक साथ राजस्व लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 6,933 मामलों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत भूमि विवादों के अलावा आबकारी, खाद्य, स्टाम्प, सरफेसी अधिनियम, गुंडा अधिनियम, दंड प्रक्रिया संहिता, विद्युत अधिनियम, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम और किराया नियंत्रण अधिनियम से जुड़े मामलों का भी समयबद्ध और पारदर्शी निस्तारण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को ऑनलाइन करते हुए रेवेन्यू कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक घर बैठे अपने मामले दर्ज कर सकते हैं।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अविवादित विरासत के मामलों में भू-स्वामी की मृत्यु के बाद तय समयसीमा के भीतर नामांतरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि मृतक की तेहरवीं या पीपलपानी तक वारिसों के नाम नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर नई खतौनी परिवार को उपलब्ध कराई जाए।

इस दौरान मुख्य सचिव Anand Bardhan ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार राजस्व मामलों का तेजी से निस्तारण किया जाएगा और लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर समाप्त किया जाएगा।

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Author: nirbhiknazar

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