देहरादून: उत्तराखंड में डिप्लोमा इंजीनियर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को 16वें दिन भी जारी रही। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की 27 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन स्तर पर लगातार वार्ता का दौर चल रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री के निर्देश पर उच्च अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के सचिवों और महासंघ के प्रांतीय पदाधिकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन यह बैठक भी बेनतीजा रही। इसके बाद से इंजीनियर्स ने आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया है।
देहरादून में लोक निर्माण विभाग के कार्यालय परिसर के बाहर बड़ी संख्या में इंजीनियर्स धरने पर डटे हुए हैं। महासंघ के अध्यक्ष इं० आर.सी. शर्मा ने चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान यदि कोई ठेकेदार अभियंता की अनुपस्थिति में निर्माण कार्य करता है, तो ऐसे कार्यों का न तो मापन किया जाएगा और न ही भुगतान।
हड़ताल का असर अब प्रदेश के बड़े प्रोजेक्ट्स पर साफ नजर आने लगा है। चारधाम यात्रा से जुड़े कार्य, सड़क निर्माण, डामरीकरण, कुम्भ परियोजनाएं, सौंग और जमरानी बांध सहित कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। इसके अलावा सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण और नहर मरम्मत कार्य भी प्रभावित हुए हैं।
पेयजल और सीवर से जुड़े कार्यों पर भी असर पड़ा है, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
महासंघ ने बताया कि उनके सदस्यों द्वारा विभिन्न निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर कार्य रुकवाए जा रहे हैं, ताकि गुणवत्ता से समझौता न हो। साथ ही कई विधायकों ने भी इस मुद्दे के समाधान के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं।
महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।