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केदारनाथ धाम के कपाट खुले, 51 क्विंटल फूलों से सजा मंदिर, सीएम धामी ने की पहली पूजा

केदारनाथ: हिमालय की गोद में बसे विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के मौके पर मंदिर को 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धाम पहुंचकर पहली पूजा-अर्चना की और कपाट खुलने के साक्षी बने।

“बम-बम भोले” के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा और देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला। पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

ग्यारहवां ज्योतिर्लिंग है केदारनाथ
भगवान केदारनाथ को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। यह धाम चारधाम यात्रा का प्रमुख केंद्र होने के साथ पंच केदार में प्रथम केदार भी माना जाता है। शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद पूजा ओंकारेश्वर मंदिर में संपन्न होती है।

पौराणिक मान्यता और इतिहास
मान्यता है कि द्वापर युग में पांडव पापों से मुक्ति पाने के लिए यहां पहुंचे थे, जहां भगवान शिव ने महिष रूप में उन्हें दर्शन दिए। इसके बाद यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई। मंदिर में त्रिकोणीय आकार का शिवलिंग विराजमान है, जिसे केदारेश्वर रूप में पूजा जाता है।

पारंपरिक विधि-विधान के साथ खुले कपाट
कपाट खुलने से पहले पंचमुखी डोली के धाम पहुंचने पर विशेष पूजा की गई। इसके बाद हवन, अभिषेक, वैदिक मंत्रोच्चारण और पहली आरती के साथ मंदिर के द्वार खोले गए। श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया गया।

2013 आपदा के बाद बदली तस्वीर
2013 केदारनाथ आपदा के बाद धाम में व्यापक पुनर्निर्माण कार्य हुए। अब बेहतर सड़क, पैदल मार्ग, हेलीकॉप्टर सेवा और सुरक्षा व्यवस्थाओं के कारण यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित और सुगम हो गई है।

आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को मजबूती
हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है और क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। केदारनाथ यात्रा अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार भी बन चुकी है।

छह माह नरऔर छह माह देवपूजा का विधान
कपाट खुलने के बाद छह माह तक ‘नर पूजा’ होती है, जबकि शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद ‘देव पूजा’ का विधान माना जाता है, जो इस धाम की अनूठी परंपरा है।

भैरव बाबा की भी विशेष मान्यता
धाम के क्षेत्ररक्षक भुकुंट भैरव की पूजा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि उनके दर्शन के बिना केदारनाथ यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती।

चारधाम यात्रा हुई पूरी तरह शुरू
19 अप्रैल को गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद आज केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं। अब गुरुवार को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह से शुरू हो जाएगी।

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Author: nirbhiknazar

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