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उत्तराखंड: जल संकट से निपटने को पंचायतों की बड़ी जिम्मेदारी, सूखते स्रोतों के संरक्षण पर जोर

देहरादून: उत्तराखंड में लगातार घटते जल स्रोतों और बढ़ते पेयजल संकट को देखते हुए सरकार अब पंचायतों को जल संरक्षण अभियान से जोड़ने जा रही है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में सूखते नौलों, धारों और प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए ग्राम स्तर पर योजनाएं तैयार की जाएंगी।

सरकार की योजना के तहत पंचायतें स्थानीय स्तर पर जल स्रोतों की पहचान कर उनके संरक्षण और पुनर्भरण का कार्य करेंगी। इसके लिए वर्षा जल संचयन, पौधरोपण, जलागम विकास और स्रोत क्षेत्रों की सुरक्षा जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही ग्रामीण समुदाय की भागीदारी बढ़ाकर जल संरक्षण को जन अभियान बनाने की तैयारी है।

पर्वतीय क्षेत्रों में कई पारंपरिक जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं, जिससे गांवों में पेयजल संकट गहराने लगा है। ऐसे में पंचायतों को जिम्मेदारी देने से स्थानीय स्तर पर निगरानी और संरक्षण कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकार का मानना है कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें जनसहभागिता भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से पंचायतों को अधिक सक्रिय भूमिका में लाने की पहल की जा रही है, ताकि भविष्य में जल संकट की चुनौती से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

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Author: nirbhiknazar

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