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न्यूनतम वेतन को लेकर फैली भ्रांतियों पर श्रम विभाग ने दी सफाई, 781 रुपये दैनिक वेतन की खबर भ्रामक

देहरादून: उत्तराखंड में न्यूनतम वेतन को लेकर चल रही चर्चाओं और भ्रम के बीच श्रम विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि श्रमिक हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और वेतन संबंधी नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।

श्रम आयुक्त पी.सी. डुमला द्वारा जारी प्रेस नोट में बताया गया कि अप्रैल माह में इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए न्यूनतम वेतन पहले ही घोषित किया जा चुका है, जबकि नॉन इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए महंगाई भत्ता (VDA) भी जारी कर दिया गया है। विभाग ने सभी उद्योगों को तय वेतन और एरियर का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

श्रम विभाग ने स्पष्ट किया कि नए श्रम कानूनों के तहत केंद्र सरकार द्वारा नेशनल फ्लोर लेवल न्यूनतम वेतन घोषित किया जाना है, जिसके बाद राज्य सरकार आवश्यकता अनुसार न्यूनतम वेतन की समीक्षा करेगी। विभाग का दावा है कि उत्तराखंड में पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक न्यूनतम वेतन निर्धारित किया गया है।

विभाग ने 781 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम वेतन लागू होने की खबरों को भी भ्रामक बताया है। श्रम आयुक्त पी.सी. डुमला के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा तय यह दर केवल उसके अधीन संचालित उपक्रमों, जैसे वेट एंड वॉच और सिक्योरिटी गार्ड सेवाओं के लिए लागू होती है, जबकि राज्य के उद्योगों पर इसका सीधा प्रभाव नहीं पड़ता।

श्रम विभाग ने उद्योगों को न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और बोनस संबंधी सभी प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही श्रमिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और औद्योगिक शांति बनाए रखें।

श्रमिकों की शिकायतों के समाधान के लिए हल्द्वानी स्थित श्रम आयुक्त कार्यालय में 24×7 कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। विभाग ने दूरभाष नंबर 05946-282805 जारी करते हुए कहा है कि किसी भी शिकायत या जानकारी के लिए श्रमिक संबंधित सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

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Author: nirbhiknazar

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