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कड़क स्वभाव, ईमानदार छवि और ‘रोडमैन’ की पहचान, ऐसे बने लोकप्रिय नेता बीसी खंडूड़ी

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का मंगलवार को निधन हो गया। उनके निधन के साथ उत्तराखंड की राजनीति के एक ऐसे अध्याय का अंत हो गया, जिसकी पहचान सादगी, अनुशासन और ईमानदार राजनीति रही।

1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे भुवन चंद्र खंडूड़ी ने अपने जीवन की शुरुआत सेना से की। भारतीय सेना की इंजीनियर्स कोर में करीब 36 वर्षों तक सेवाएं देने के दौरान उन्होंने अनुशासन और सख्त कार्यशैली की अलग पहचान बनाई। वर्ष 1982 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया।

सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। कहा जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनकी साफ छवि और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें सक्रिय राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने भाजपा के साथ लंबा राजनीतिक सफर तय किया और कई बार गढ़वाल से सांसद चुने गए।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री रहते हुए उन्होंने सड़क परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को गति देने और पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क सुधारने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। उत्तराखंड में लोग अक्सर कहते थे कि जहां खंडूड़ी जाते थे, वहां सड़क पहुंच जाती थी। इसी वजह से उन्हें ‘रोडमैन’ के नाम से भी पहचान मिली।

साल 2007 में उत्तराखंड में भाजपा सरकार बनने के बाद खंडूड़ी मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के रूप में उनकी छवि बेहद सख्त लेकिन ईमानदार प्रशासक की रही। वे अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने के निर्देश देते थे और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलते थे।

उनके कार्यकाल में ट्रांसफर-पोस्टिंग की राजनीति पर नियंत्रण की कोशिशें भी चर्चा में रहीं। हालांकि उनकी सख्त कार्यशैली कई बार पार्टी के भीतर असहजता का कारण भी बनी, लेकिन आम जनता के बीच उनकी साफ-सुथरी छवि ने उन्हें खास सम्मान दिलाया।

2012 के विधानसभा चुनाव में वे कोटद्वार सीट से चुनाव हार गए, लेकिन उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी पर कभी सवाल नहीं उठे। राजनीतिक विरोधी भी अक्सर उनकी साफ छवि की तारीफ करते थे।

भुवन चंद्र खंडूड़ी निजी जीवन में भी बेहद सादगी पसंद थे। समय की पाबंदी और अनुशासन उनकी सबसे बड़ी पहचान मानी जाती थी। उनकी बेटी ऋतु भूषण खंडूड़ी भी वर्तमान में सक्रिय राजनीति में हैं।

पिछले कुछ वर्षों से वे बीमार चल रहे थे। वर्ष 2025 में उनकी ब्रेन सर्जरी भी हुई थी। उम्र संबंधी समस्याओं के चलते वे सक्रिय राजनीति से दूर हो गए थे। उनके निधन से उत्तराखंड ही नहीं, राष्ट्रीय राजनीति में भी शोक की लहर है।

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Author: nirbhiknazar

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