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CBSE में शामिल हुई मैथिली भाषा, NEP 2020 के तहत मिला दर्जा…

देहरादून/नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए मैथिली भाषा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य मातृभाषा और भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देना है।

इस फैसले के बाद अब 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्र मैथिली भाषा को एक विषय के रूप में चुन सकेंगे। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय NEP 2020 के उस लक्ष्य को पूरा करता है, जिसमें क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है।

मैथिली भाषा, जो बिहार के मिथिलांचल, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में व्यापक रूप से बोली जाती है, को पहले ही वर्ष 2003 में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा चुका है। अब CBSE पाठ्यक्रम में शामिल होने के बाद छात्रों को अपनी मातृभाषा और संस्कृति से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।

मिथिलांचल क्षेत्र में इस फैसले को लेकर खुशी की लहर देखी जा रही है। साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा है कि इससे मैथिली साहित्य, संस्कृति और लोक परंपराओं के संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से न केवल छात्रों को अपनी भाषा में पढ़ाई का अवसर मिलेगा, बल्कि मैथिली शिक्षकों के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। साथ ही मिथिला की समृद्ध साहित्यिक विरासत को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

मैथिली को भारत की प्राचीन भाषाओं में गिना जाता है और यह महान कवि विद्यापति की साहित्यिक भाषा रही है। CBSE का यह फैसला देश में भाषाई विविधता और मातृभाषा शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Author: nirbhiknazar

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