हरिद्वार: शुक्रवार रात को अपने मठ में पत्रकार में ज्योतिष एवं द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने देवस्थानम बोर्ड का जो गठन किया है वह बिल्कुल गलत है हिंदुओं के मंदिरों को ही सरकार क्यों अधिगृहित कर रही है और उनकी व्यवस्था में सरकारी तंत्र का जाल बिछाया जा रहा है। क्या सरकार मस्जिदों गिरजाघरों या अन्य धर्म के अनुयायियों के धर्म स्थलों का अधिकरण कर सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू धर्म को मानती ही नहीं, क्योंकि संघ परिवार वैदिक धर्म को नहीं मानता है वह ना वेदों पर विश्वास करता है। जबकि हिंदू धर्म का मुख्य आधार वेद है जो भगवान की वाणी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर नहीं बन रहा है बल्कि विश्व हिंदू परिषद का कार्यालय बन रहा है जिसमें अवैध शंकराचार्य वासुदेवानंद जैसे लोग शामिल हैं इसलिए राम मंदिर के मौजूदा ट्रस्ट में चारों पीठों के शंकराचार्य को रखना चाहिए था। ट्रस्ट में केवल विश्व हिंदू परिषद और उनके समर्थक संतों को रखा गया है। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे का नाम आदि जगतगुरु शंकराचार्य के नाम पर रखा जाना चाहिए क्योंकि शंकराचार्य ने कई सालों से बंद पड़ी चार धाम यात्रा गंगोत्री यमुनोत्री बद्रीनाथ केदारनाथ की शुरुआत कराई थी और इन तीनों की पुरानी खोई हुई पहचान को वापस लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था।