निर्भीक ब्यूरो
हरिद्वार: कुंभ मे कोरोना नियमों के पालन करने के लिए प्रशासनिक सख्ती देख हरिद्वार महाकुंभ मे कई संतों ने केंद्र व प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। आपको बता दें की 1 अप्रैल से कुंभ शुरू हो चुका है जो 30 अप्रैल तक चलेगा। देश मे इस वक़्त कोरोना से हाहाकार मचा हुआ है दोबारा देश मे कोरोना के मरीज स्पीड के साथ बढ़ रहे हैं ऐसे मे सुरक्षा के लिहाज से श्रद्धालुओं के कोरोना निगेटिव रिपोर्ट लाने को कहा गया है जिसके लिए प्रशासन उत्तराखंड मे प्रवेश करने वाले बार्डर पर सख्त रुख अपना रहा है तथा जो श्रद्धालु कोरोना निगेटिव रिपोर्ट नहीं दिखा प रहे ऐसे लोगों को प्रशासन वापिस भेज रहा है। जिसके चलते कुंभ मे बहुत कम श्रद्धालु पहुँच रहे हैं और इसका विरोध करके साधु संत राज्य और केंद्र सरकार को घेर रहे हैं और पाबन्दियाँ हटाने के लिए मांग कर रहे हैं।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कोरोना के लिए जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि “जब बिना रोक-टोक और कोरोना रिपोर्ट के चुनावी सभाएं हो सकती हैं तो फिर बारह वर्षों में होने वाला कुंभ क्यों नहीं?” स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दो टूक कहा कि सरकार कॉविड टेस्ट रिपोर्ट लाने संबंधी जबरदस्ती के नियम क्यों बना रही है। शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुताबिक, सरकार का महाकुंभ को लेकर ढुलमुल रवैया कुंभ पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कभी सरकार कहती है कि महाकुंभ भव्य तरह से नहीं होगा। कभी सरकार कहती है कि साधु संत ज्यादा जमावड़ा न लगाएं। कभी सरकार कहती है कि कुंभ खुलकर होगा। और अब सरकार ने 72 घंटे की कोरोनावायरस जांच रिपोर्ट के साथ कुंभ क्षेत्र में आने के लिए श्रद्धालुओं को कह रही है। ऐसे में सरकार की इतनी सारी बातें श्रद्धालुओं को भ्रम में डाल रही हैं। और श्रद्धालु महाकुंभ में आने से हिचक रहे हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाया कि बिहार, बंगाल, असम और केरल चुनाव में चुनावी रैलियों के दौरान लाखों की भीड़ जमा हो रही है। इस भीड़ में से कितने लोगों के पास कोरोना टेस्ट रिपोर्ट? ऐसा कैसे हो सकता है कि केवल महाकुंभ में ही लोगों के आने से कोरोनावायरस फैल रहा हो। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सरकार को पूरे देश के लिए एक गाइडलाइन रखनी चाहिए।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
ज्योतिष एवं द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि कोरोना सरकारी आदेश पर चलता है। देश के कई राज्य में विधानसभा के चुनाव में आयोजित रैलियों में सरकार को कोरोना नजर नहीं आया। लेकिन हिंदुओं के महापर्व कुंभ मेले में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कोरोना को लेकर दिशा-निर्देश जारी होते हैं और लोगों को सनातन धर्म के सबसे बड़े आस्था के पर्व कुंभ में आकर ठहरने के लिए सरकार कोरोना के बड़े-बड़े दिशा निर्देश जारी करती है।
श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज
श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से मांग की है कि कोरोना नियमों में ज्यादा सख्ती न बरती जाए। इनमें श्रद्धालुओं को कुछ छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का महापर्व है। कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता ठीक है लेकिन जगह -जगह कोरोना जांच करना सही नहीं है। यदि एक गाड़ी की जांच करने में दस मिनट लगेंगे तो बार्डर पर चारों दिशाओं में जाम की स्थिति बन जाएगी। इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। राज्य सरकार की ओर से एक सकारात्मक संदेश जाए कि सभी श्रद्धालु भक्त कुंभ मेले में आस्था की डुबकी लगाएं। उन्होंने कहा कि सभी लोग शिक्षित हैं। कोरोना की गाइड लाइन का पालन कर रहे हैं। एक दिन स्नान कर वापस लौट जाने से कोरोना बढ़ेगा नहीं। उन्होंने कहा कि शाही स्नानों पर लोग हरिद्वार आगमन करेंगे तो कोरोना की मार झेल रहे व्यापारी वर्ग को भी बड़ी राहत मिलेगी। सरकार को कड़े प्रतिबंध न लगाकर कोरोना नियमों में ढिलाई बरतनी चाहिए।