देहारादून: उत्तराखंड मे सत्ता परिवर्तन के बाद एक तरफ जहां लगातार पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र के फैसले सीएम तीरथ ने पलटे हैं वहीं तीरथ मंत्रिमंडल के मंत्री भी पीछे नहीं रहना चाहते वो भी लगातार पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र द्वारा किए गए फैसलों को बादल रहे हैं, आपको बता दें त्रिवेन्द्र ने गैरसेण को कमिश्नरी घोषित किया जिस पर वर्तमान सीएम तीरथ ने रोक लगा दी, त्रिवेन्द्र ने कुंभ मे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोरोना निगेटिव रिपोर्ट लाने के लिए नियम बनाया गया जिसे सीएम तीरथ ने आस्था के नाम पर खत्म किया हालांकि बाद मे हाईकोर्ट के दखल के बाद श्रद्धालुओं के लिए कुंभ मे कोरोना निगेटिव रिपोर्ट लाने को अनिवार्य कर दिया गया। उसके बाद सल्ट उपचुनाव मे त्रिवेन्द्र का नाम स्टार प्रचारकों की सूची से गायब कर दिया। हद तो तब हुई जब तीरथ सरकार ने त्रिवेन्द् द्वारा भाजपा मे बनाए गए 114 दर्जाधारियों का दर्जा वापिस ले लिया और उन्हे पद से हटा दिया गया। यानि सीएम तीरथ ने त्रिवेंद्र कार्यकाल में नियुक्त संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को छोड़कर बाकी सभी आयोगों, निगमों, परिषदों में तैनात दायित्वधारियों की छुट्टी कर दी। अब उत्तराखंड के मंत्री भी पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत के फैसले बदलने मे लगे हैं।

अब श्रम कल्याण मंत्री हरक सिंह रावत ने भी पूर्व सीएम का एक फैसला पलटकर रख दिया है आपको बता दें मंत्री हरक सिंह रावत ने त्रिवेंद्र रावत सरकार में कर्मकार कल्याण बोर्ड से त्रिवेंद्र रावत के कार्यकाल में हटाए गए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सभी कर्मचारियों की वापसी का आदेश दिया है। हरक सिंह रावत ने कर्मचारियों को हटाए जाने के त्रिवेंद्र रावत सरकार के आदेश को अनुचित बताते हुए कहा है कि इन कर्मचारियों को उसी दिन से वेतन दिया जाए, जिस दिन से इनको हटाया गया था। ऐसे करीब बारह से अधिक कर्मचारी हैं। यानि हरक सिंह रावत का कहना है की पूर्व सीएम ने इन्हे हटाकर गलत फैसला लिया था।
हरक सिंह रावत का ये भी कहना है कि उनको गलत ढंग से हटाया गया था। जानबूझकर उनके खिलाफ एक ऐसा माहौल तैयार किया गया, जैसे कोई घोटाला हुआ हो। हरक सिंह रावत का कहना है कि त्रिवेंद्र रावत सरकार का ये कदम नासमझी भरा था। अगर इतने ही पावरफुल त्रिवेंद्र रावत थे या उनके सहयोगी थे, तो मुझे मंत्री पद से हटा देते।

इससे पहले गुरुवार को त्रिवेंद्र रावत सरकार में कर्मकार बोर्ड में सचिव पद पर तैनात की गईं पीसीएस अफसर दीप्ति सिंह को हटाकर उनकी जगह उप श्रमायुक्त हरिद्वार मधु नेगी चौहान को बोर्ड का सचिव नियुक्त कर दिया गया था। मधु नेगी चौहान उप श्रमायुक्त हरिद्वार के साथ-साथ बोर्ड के सचिव का भी कार्यभार देखेंगी। इसे पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। क्योंकि त्रिवेंद्र रावत सरकार में कर्मकार कल्याण बोर्ड में बड़े घपले का आरोप लगाते हुए श्रम मंत्री को ही बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। श्रम मंत्री को भी कानोकान इसकी भनक तक नहीं लगी थी। उनकी जगह दायित्वधारी शमशेर सिंह सत्याल को बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया गया था। इतना ही नहीं श्रम मंत्री हरक सिंह को बोर्ड पद से हटाने के बाद सचिव पद पर तैनात उनकी पसंदीदा अधिकारी दमयंती रावत की भी अगले कुछ दिनों में विदा कर दिया गया था। इसके बाद साइकिल वितरण से लेकर श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन तक तमाम मामलों पर जांच बैठा दी गई थी। इसको लेकर हरक सिंह रावत तब खून का घूंट पीकर रह गए थे। लेकिन, अब सीएम बदलते ही हरक सिंह रावत एक बार फिर फुलफार्म में हैं। बहरहाल, उत्तराखंड की राजनीति में सालों से पल रहा उबाल अब खुलकर बहने लगा है।
निर्भीक नज़र के लिए न्यूज़ एडिटर मौ0 तारिक अंसारी की रिपोर्ट