देहरादून: उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होती नजर आ रही हैं। भारतीय जनता पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में हारी 23 सीटों को दोबारा जीतने के लक्ष्य के साथ विशेष प्रवास अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक और कोर कमेटी के सदस्य अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में दो दिवसीय प्रवास कर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से संवाद और फीडबैक ले रहे हैं।
भाजपा के अनुसार यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारी के रूप में भी देख रहे हैं।
23 हारी सीटों पर विशेष फोकस
भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने बताया कि पार्टी के सभी 47 विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में दो दिवसीय प्रवास कर रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद और राज्य सरकार के मंत्री उन 23 विधानसभा क्षेत्रों में प्रवास कर रहे हैं, जहां 2022 के चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में संगठन को और मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने और जनता से सीधा संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है। 13 जून से शुरू हुआ यह प्रवास कार्यक्रम 16 जून तक निर्धारित था, हालांकि कुछ नेताओं की व्यस्तता के कारण यह अभियान 20 जून तक जारी रहेगा।
2027 चुनाव की तैयारी में जुटीं दोनों पार्टियां
प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा रहा है। भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर हैट्रिक लगाने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस दो चुनावों से सत्ता से बाहर रहने के बाद वापसी की रणनीति तैयार कर रही है।
कांग्रेस का हमला
भाजपा के प्रवास अभियान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि भाजपा चुनावी रणनीति बनाने में व्यस्त है, जबकि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा 2022 में हारी 23 सीटों को जीतने के लिए मेहनत कर रही है, लेकिन जिन 47 सीटों पर वह जीती थी, वहां जनता सरकार से नाराज है। धस्माना ने दावा किया कि प्रदेश में बने मौजूदा माहौल को देखते हुए भाजपा को आगामी चुनाव में नुकसान उठाना पड़ेगा।
संगठन विस्तार पर जोर
भाजपा का कहना है कि प्रवास कार्यक्रम के दौरान बूथ स्तर तक संगठन की समीक्षा, कार्यकर्ताओं से संवाद और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वहीं कांग्रेस इसे चुनावी तैयारी बताते हुए सरकार पर जनहित के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं और आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में ऐसे अभियान और भी तेज देखने को मिल सकते हैं।