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“धामी की मौजूदगी में किशाऊ बांध पर बनी ऐतिहासिक सहमति, उत्तर भारत को मिलेगा पानी और बिजली का बड़ा तोहफा”

नई दिल्ली। वर्षों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर मंगलवार को बड़ा फैसला हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच परियोजना के लिए एमओयू पर सहमति बन गई। एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय गृह सचिव, जल शक्ति सचिव, विद्युत मंत्रालय के सचिव तथा दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

हिमाचल के हिस्से का खर्च उठाएंगे दिल्ली और राजस्थान

किशाऊ परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत खर्च छह राज्यों को साझा करना होगा।

हिमाचल प्रदेश अपने हिस्से का अंशदान देने को तैयार नहीं था और उसका तर्क था कि परियोजना से मुख्य लाभ निचले राज्यों को मिलेगा। बैठक में इस गतिरोध का समाधान निकालते हुए सहमति बनी कि हिमाचल प्रदेश के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को आवंटित किया जाएगा तथा इसके बदले दोनों राज्य हिमाचल के हिस्से की लागत वहन करेंगे। राजस्थान पहले ही दिसंबर 2025 में अतिरिक्त वित्तीय योगदान देने पर सहमत हो चुका था।

टोंस नदी पर बनेगा एशिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध

किशाऊ बांध उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के बीच यमुना की सहायक टोंस नदी पर प्रस्तावित है। परियोजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—

  • बांध की ऊंचाई : 236 मीटर
  • लंबाई : 680 मीटर
  • विद्युत उत्पादन क्षमता : 660 मेगावाट
  • वार्षिक हरित ऊर्जा उत्पादन : 1,379 मिलियन यूनिट
  • सिंचाई क्षमता : 97,076 हेक्टेयर भूमि

परियोजना से उत्पादित बिजली उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को समान रूप से मिलेगी, जबकि सिंचाई और पेयजल का लाभ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा।

राजस्थान को मिलेगा 10 प्रतिशत पानी

ऊपरी यमुना बेसिन में रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ जैसी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राजस्थान को पहली बार लगभग 10 प्रतिशत अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा, जिससे पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

यमुना जल का प्रस्तावित आवंटन

राज्य पानी (क्यूसेक)
हरियाणा 6417
उत्तर प्रदेश 4515
राजस्थान 1917
दिल्ली 811
हिमाचल प्रदेश 423

विशेषज्ञों के अनुसार किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के अमल में आने से जल प्रबंधन, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर भारत के कई राज्यों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

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Author: nirbhiknazar

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