हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल में भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए CM के निर्देशों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री सचिव दीपक रावत की अध्यक्षता में आयोजित लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में अल्मोड़ा, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जनपदों के कुल 77 मामलों की समीक्षा की गई। इनमें से 30 मामलों में एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की गई है।
बैठक में अल्मोड़ा जिले के एक, ऊधमसिंह नगर के 12 और नैनीताल जिले के 17 मामलों में प्रथम दृष्टया अनियमितताएं पाए जाने पर मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई। समिति ने लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त दीपक रावत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि भूमि संबंधी धोखाधड़ी और विवादों के मामलों में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता की संपत्ति और राजस्व अभिलेखों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
बैठक में बैंकों की भूमिका पर भी गंभीर चर्चा हुई। मंडलायुक्त ने कहा कि यदि किसी संपत्ति को बंधक रखकर ऋण स्वीकृत किया गया है और बाद में उसी संपत्ति की बिक्री होती है, तो बैंक की जिम्मेदारी भी तय होगी। नियमों की अनदेखी करने वाले बैंक भी जांच और कार्रवाई के दायरे में आएंगे।
एक ही भूमि की बार-बार रजिस्ट्री (मल्टीपल रजिस्ट्री) के मामलों को गंभीर मानते हुए उन्होंने संबंधित रजिस्ट्रार और उप-पंजीयकों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। साथ ही दाखिल-खारिज से पहले लेखपालों द्वारा स्थलीय निरीक्षण न किए जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बिना भौतिक सत्यापन के रिकॉर्ड में बदलाव भूमि धोखाधड़ी को बढ़ावा देता है।
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं निवेदिता कुकरेती, एसएसपी मंजूनाथ टीसी, एसएसपी अजय कुमार गणपति समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का कहना है कि भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर आगे भी लगातार निगरानी रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।