हल्द्वानी। हरिद्वार के शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने हल्द्वानी दौरे के दौरान मंदिरों के संचालन में सरकारी हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए देशभर के मठों और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों का संचालन संत समाज और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए।
स्वामी आनंद स्वरूप ने आरोप लगाया कि सरकारी नियंत्रण के कारण मंदिरों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की आशंका बढ़ती है। उन्होंने कहा कि कई अधिकारी मंदिरों में तैनाती पाने के लिए प्रयास करते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य धार्मिक सेवा नहीं बल्कि संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना होता है। उनका दावा था कि मंदिरों में चढ़ावे और अन्य सामान की कथित चोरी जैसी घटनाएं भी इसी व्यवस्था की खामियों को उजागर करती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मंदिरों का संचालन संत समाज और धार्मिक ट्रस्टों के हाथों में होगा तो पारदर्शिता और जवाबदेही बेहतर होगी तथा इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से धार्मिक संस्थानों को स्वायत्त व्यवस्था देने की मांग की।
इस दौरान स्वामी आनंद स्वरूप ने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “श्रीराम की कृपा से भाजपा सत्ता में आई है और यदि रामभक्तों की भावनाओं की अनदेखी हुई तो श्रीराम ही भाजपा को सत्ता से विदा भी करेंगे।”
स्वामी आनंद स्वरूप के इस बयान के बाद प्रदेश के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।