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उत्तराखंड मॉडल की देशभर में होगी चर्चा, अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम पर बोले किरेन रिजिजू

देहरादून। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उत्तराखंड में लागू अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बनेगा। उन्होंने कहा कि अच्छा मॉडल और प्रभावी व्यवस्था को दूसरे राज्य भी अपनाने का प्रयास करेंगे।

देहरादून में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के दौरान पत्रकारों से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि उत्तराखंड में लागू नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार सभी समुदायों के बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा तुष्टिकरण नहीं, बल्कि न्याय की नीति पर काम कर रही है।

राज्य में एक जुलाई 2026 से लागू नई व्यवस्था के तहत मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता अनिवार्य कर दी गई है। प्रदेश के 452 पंजीकृत मदरसों को अब शिक्षा विभाग के मानकों के अनुरूप मान्यता लेनी होगी। इनमें करीब 50 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। अब तक 158 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जबकि नौ अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को स्वीकृति भी मिल चुकी है।

नई व्यवस्था के तहत मदरसों में दोहरी पाली में पढ़ाई होगी। सुबह की पाली में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे आधुनिक विषय पढ़ाए जाएंगे, जबकि दूसरी पाली में धार्मिक शिक्षा के साथ संविधान, मानवाधिकार, राष्ट्रीय एकता और नैतिक मूल्यों का अध्ययन कराया जाएगा। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों के विद्यार्थियों को राज्य शिक्षा बोर्ड का प्रमाणपत्र भी मिलेगा।

रिजिजू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा कि फिलहाल पूरे देश में इस व्यवस्था को लागू करने की घोषणा नहीं की जा सकती, लेकिन उत्तराखंड का सफल मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है।

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Author: nirbhiknazar

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