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“देहरादून कलेक्ट्रेट में संग्रह अमीनों की नियुक्ति बनी राजनीति का अखाड़ा”

देहरादून। देहरादून कलेक्ट्रेट में संग्रह अमीनों की नियुक्ति और स्थानांतरण एक बार फिर विवादों में है। कभी इन्हें मूल तैनाती से हटाकर कलेक्ट्रेट से संबद्ध कर दिया जाता है, तो कभी शिकायतों के बाद नियमों का हवाला देकर वापस भेज दिया जाता है।

जिला प्रशासन का कहना है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है जिसे अनावश्यक तूल दिया जा रहा है।

ताजा मामला दीपक नेगी संग्रह अमीन की नियुक्ति से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार करीब 15 दिन पहले हुई इनकी तैनाती में से एक संग्रह अमीन को ADM केके मिश्रा ने अपने कार्यालय में वापस ले लिया। इसके बाद से कलेक्ट्रेट परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

ADM मिश्रा ने बताया कि अमीनों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण जिलाधिकारी महोदय से मौखिक आदेश लेने के बाद ही की गई थी।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार दोनों कर्मियों की नियुक्ति में जिलाधिकारी की मौखिक सहमति ली गई थी। कलेक्ट्रेट में स्टाफ की कमी को देखते हुए समय-समय पर अमीनों की सेवाएं लेने की परंपरा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इसमें कोई नई बात नहीं है।

लेकिन नए जिलाधिकारी के कार्यभार संभालने के बाद कलेक्ट्रेट में “तबादला और तवज्जो” को लेकर खींचतान बढ़ गई है। आरोप है कि कुछ अधीनस्थ अधिकारी अपना वर्चस्व दिखाने के लिए इस तरह के मामलों को जानबूझकर सोशल मीडिया पर उछाल रहे हैं, जो कलेक्ट्रेट की गरिमा के अनुकूल नहीं है।

प्रशासन का पक्ष: अधिकारियों का कहना है कि जरूरत के हिसाब से स्टाफ एडजस्टमेंट सामान्य प्रक्रिया है।  जो जनहित में कार्यों को देखकर लिया जाता है रहा है ।*

चर्चा का विषय*: वहीं कर्मचारियों में चर्चा है कि नए DM के आते ही कलेक्ट्रेट में “सहमति का खेल” तेज हो गया है।

अब देखना यह है कि जिलाधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और आदेश वाजिब थे या इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है।

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Author: nirbhiknazar

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