जोशीमठ: विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की व्यवस्थाएं संभालने वाली बदरी-केदार मंदिर समिति इस समय गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में आ गई है। मंदिर समिति के प्रबंधन और हालिया बोर्ड बैठकों के निर्णयों पर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि समिति के रसूखदार अधिकारी और पदाधिकारी दानदाताओं के पैसों का इस्तेमाल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं पर करने के बजाय, खुद के लिए आलीशान दफ्तरों को चमकाने और अपनी सुख-सुविधाएं बढ़ाने में खुलेआम कर रहे हैं।
पूरा मामला मंदिर समिति के कार्यालयों के गैर-जरूरी स्थानांतरण और फिजूलखर्ची से जुड़ा हुआ है। देहरादून के पॉश इलाके कैनाल रोड पर मंदिर समिति का अपना एक बेहद भव्य कार्यालय संचालित हो रहा था, जिसके रख-रखाव (मेंटेनेंस) पर वर्ष 2025 में ही 15 लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम धनराशि खर्च की गई थी।
लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस बड़े खर्च के तुरंत बाद रहस्यमयी ढंग से इस दफ्तर को अचानक खाली कर दिया गया और मुख्य कामकाज को ऋषिकेश स्थानांतरित कर दिया गया। अब मंदिर समिति का मुख्य प्रशासनिक ठिकाना ऋषिकेश में किराये के भवनों में शिफ्ट हो चुका है, जिसका हर महीने हजारों रुपये किराया सरकारी खजाने से चुकाया जा रहा है।
चौंकाने वाला पहलू यह है कि ऋषिकेश के रेलवे रोड और चंद्रभागा जैसी प्राइम लोकेशनों पर समिति के अपने दो विशाल यात्री विश्राम गृह और कार्यालय पहले से मौजूद हैं, जो रखरखाव न होने के कारण आज बदहाली के आंसू रो रहे हैं।
यही नहीं, देहरादून के कांवली चौक में भी मंदिर समिति की एक बहुत बड़ी संपत्ति और विश्राम गृह है, जो अधिकारियों की घोर उदासीनता के कारण अब पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच चुका है।