देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ते साइबर वित्तीय अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और उत्तराखंड पुलिस ने संयुक्त रणनीति तैयार की है। पुलिस महानिरीक्षक (एसटीएफ/साइबर) निलेश आनंद भरणे की अध्यक्षता में आयोजित समन्वय बैठक में साइबर ठगी की रोकथाम, पीड़ितों की धनराशि की शीघ्र वापसी तथा बैंक और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में तय किया गया कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में 24 घंटे बैंक-पुलिस समन्वय एवं त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित किया जाएगा। इसके तहत शनिवार, रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दौरान भी सभी बैंकों में ड्यूटी या ऑन-कॉल नोडल अधिकारी तैनात किए जाएंगे, ताकि शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जा सके।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि वर्तमान में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े करीब 80 करोड़ रुपये विभिन्न स्तरों पर होल्ड किए गए हैं। विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह राशि पीड़ितों को वापस दिलाने की कार्रवाई की जा रही है।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि साइबर ठगी की सूचना मिलते ही गोल्डन आवर के दौरान बैंक तत्काल संबंधित राशि को होल्ड या फ्रीज करें, जिससे पीड़ितों की अधिकतम धनराशि सुरक्षित रखी जा सके। इसके लिए बैंक और पुलिस के बीच सूचना आदान-प्रदान की व्यवस्था को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक हर्ष कुमार गौतम ने साइबर अपराधों में उपयोग किए जाने वाले म्यूल अकाउंट्स की पहचान, संदिग्ध बैंक खातों की निगरानी और बैंकिंग प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों और बैंकिंग संस्थानों के बीच त्वरित सूचना साझा करने की आवश्यकता भी बताई।
पुलिस महानिरीक्षक (एसटीएफ/साइबर) निलेश आनंद भरणे ने बताया कि बैंक अधिकारियों, पुलिस कर्मियों और आम नागरिकों के लिए संयुक्त साइबर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि साइबर अपराधों की रोकथाम के साथ पीड़ितों को समय पर राहत मिल सके।