देहरादून। उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन को रोजगार, उद्यमिता और स्टार्टअप से जोड़ने की तैयारी है। नई सहकारिता नीति में युवाओं को सहकारी क्षेत्र से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, स्टार्टअप और भर्ती को एकीकृत व्यवस्था के तहत लाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार तलाशने वाले के बजाय रोजगार देने वाला उद्यमी बनाना है।
नीति के तहत युवाओं को सहकारी संस्थाओं में रोजगार और कारोबार की संभावनाओं की जानकारी देने के लिए प्रेरणा कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। विद्यार्थियों और युवाओं के लिए अल्पावधि इंटर्नशिप की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, ताकि वे सहकारी संस्थाओं के कामकाज को करीब से समझ सकें।
नई नीति में सहकारिता को उच्च शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए सहकारी पाठ्यक्रम, स्थानीय उदाहरण और डिजिटल माध्यम से सीखने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही सहकारी क्षेत्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था में रोजगार की संभावनाओं की जानकारी मिल सकेगी।
सहकारी क्षेत्र में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एकीकृत सहकारी रोजगार पोर्टल, स्वतंत्र चयन प्रक्रिया और करियर परामर्श केंद्र स्थापित करने की योजना है। विश्वविद्यालयों को भी सहकारी क्षेत्र से जोड़कर शोध, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता विकसित की जाएगी।
खास तौर पर पर्वतीय जिलों में स्थानीय संसाधनों और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े स्वरोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर रहेगा। जिला स्तर पर कौशल विकास केंद्र स्थापित कर स्थानीय जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण देने की योजना है। महिला उद्यमिता को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार नई नीति का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को आधुनिक बनाते हुए युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार करना है। इससे प्रदेश में सहकारिता को आर्थिक विकास और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनाने में मदद मिलेगी।