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आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र बनेगा ऋषिकुल – CM धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में हरिद्वार स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान ऋषिकुल के समग्र विकास के प्रस्तावित मास्टर प्लान की समीक्षा की। बैठक में संस्थान के प्रस्तावित स्वरूप और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके विकास में आयुर्वेद, स्वास्थ्य पर्यटन, योग, ज्योतिष और वैदिक गणित को विशेष प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शैक्षणिक, शोध और अध्ययन की सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध के बीच प्रभावी सेतु की भूमिका निभा सके। उन्होंने कहा कि आयुष, योग और संस्कृत देवभूमि उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान हैं और ऋषिकुल के विकास में इस पहचान को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि परिसर का वास्तुशिल्प प्राचीन एवं पारंपरिक स्थापत्य शैली पर आधारित हो। भवनों के बाहरी स्वरूप में प्राचीन स्थापत्य की झलक दिखाई दे, जबकि परिसर में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। प्राचीनता और आधुनिकता के संतुलित समन्वय से परिसर की अलग पहचान विकसित करने पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे परिसर को इस तरह विकसित किया जाए कि यहां आने वाले लोगों को भारतीय संस्कृति, ज्ञान और अध्यात्म की अनुभूति हो। हरिद्वार में देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में ऋषिकुल को भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और अध्यात्म की समृद्ध विरासत को जानने और अनुभव करने के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के सभी कार्यों को चरणबद्ध तरीके से समयबद्ध पूरा करने के निर्देश दिए। सभी कार्यों के लिए स्पष्ट चरण और समयसीमा तय करते हुए परियोजना को दो वर्ष के भीतर पूरा करने तथा नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा।

प्रस्तावित मास्टर प्लान में ऋषिकुल को योग एवं ध्यान, उच्च स्तरीय शिक्षा, आयुर्वेद एवं समग्र स्वास्थ्य, भारतीय दर्शन, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, कला-संस्कृति और शोध गतिविधियों के समन्वित केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

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Author: nirbhiknazar

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