हरिद्वार: श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि से मिले प्रेयस मंत्र के साथ ही 200 महिलाएं नागा संन्यासी यानी अवधूत आणि के रूप में दीक्षित हो गईं हैं। इसके साथ ही वो जूना अखाड़े की नागा संन्यासी का हिस्सा बन गई। गुरुवार को इन सभी को अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने नागा संन्यासी दीक्षा के दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन ब्रह्म मुहूर्त में प्रेयस मंत्र की दीक्षा दी। इससे पहले इन सभी ने दीक्षा कार्यक्रम के पहले दिन शिखा सूत्र त्याग के साथ ही मुंडन संस्कार और अन्य संस्कार पूरे किए थे। उसके बाद अखाड़े की छावनी में स्थापित धर्म ध्वजा के नीचे पूरी रात ओम नमः शिवाय मंत्र और पंचाक्षरी मंत्र का जाप किया था। ब्रहमुहूर्त में गंगा स्नान करने के बाद सांसारिक वस्त्र का त्याग करने के साथ ही उन्होंने अखाड़े की ओर से मिले ब्रह्मतानी वस्त्र धारण किया और प्रेयस मंत्र के साथ अवधूतानी के रूप में अपना नया परिचय पाया।

नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षित होने वाली अवधूतानी को अपना पुराना नाम, स्थान और परिचय का त्याग करना पड़ता है। श्रीमहंत हरि गिरि बताते हैं कि सभी अवधूतानी को संन्यास दीक्षा के बाद उनके गुरु व अखाड़े की ओर से नया नाम दिया जाता है। नया नाम मिलने के बाद उनका संन्यास पूर्व की जिंदगी के स्वजन, माता-पिता व सगे-संबंधियों से संपर्क पूरी तरह खत्म हो जाता है। अब उनके गुरु ही उनके सब कुछ होते हैं। दीक्षा के बाद उन्हें माई या माता कहकर संबोधित किया जाता है।

भाजपा नेत्री सरोज शर्मा से बनी माई कैलाश गिरि
श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि से गुरुवार को अवधूतानी के रूप में दीक्षा लेने वाली 200 महिलाओं में माई कैलाश गिरि भी शामिल हैं। इस भाजपा नेत्री का सांसारिक नाम सरोज शर्मा था, जो नागा संन्यासी के रूप में दीक्षा के बाद माई कैलाश गिरि हो गया। माई कैलाश गिरि ने बताया कि वह भाजपा के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष के साथ ही उत्तर प्रदेश में अन्य आनुषांगिक सनगठनों में प्रदेश स्तर के कई पदों पर रही हैं। इसके अलावा सामाजिक क्षेत्र में भी उन्होंने काफी काम किया है। संन्यास दीक्षा की व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए उन्होंने अपने जिले, घर और स्थान आदि का नाम बताने में असमर्थता जताई। कहा कि उनके गुरु दूधेश्वर पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि हैं और हर नंदेश्वर महादेव मंदिर ङ्क्षहडन गाजियाबाद में उनका निवास है। उन्होंने हिंदी साहित्य, राजनीति विज्ञान और इतिहास विषय से स्नातक की डिग्री ली। हिंदी के साथ-साथ उन्हें अंग्रेजी का भी ज्ञान है और थोड़ा-बहुत उर्दू की भी समझ है। माई कैलाश गिरि ने बताया कि उन्होंने श्रीमहंत नारायण गिरि से प्रभावित होकर वर्ष 2010 में कैलास-मानसरोवर की यात्रा की थी। उस दौरान उन्हें धर्म की गहन अनुभूति हुई। इस यात्रा ने उनके मन, बुद्धि व कर्म पर इस कदर प्रभाव डाला कि सांसारिक वस्तुओं और व्यवस्था से उनका मोह भंग हो गया। गुरुदेव के सानिध्य में धर्म का आचरण एवं पालन कर कठिन तपस्या की और हरिद्वार कुंभ में पूर्ण रूप से संन्यास ग्रहण कर लिया। कहा कि राजनीति तो अब बीती बात हो गई है, पर समाज सुधार और सेवा का कार्य वह अब भी कर रही हैं और आगे भी करती रहेंगी।

नागा संन्यास दीक्षा का दूसरा चरण 25 अप्रैल से
अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि अब अखाड़े में नागा संन्यास दीक्षा का दूसरा चरण 25 अप्रैल से शुरू होगा। इसमें एक हजार से अधिक महिला-पुरुष नागा संन्यासी दीक्षा लेंगे। इसके लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।