देहारादून: जी हाँ उत्तराखंड मे जिस फैसले को त्रिवेन्द्र सराकर ने लेकर जबरदस्ती अपनी पीठ थपथपाई थी और फिर भाजपा के ही मंत्रियों और विधायकों के साथ उत्तराखंड की जनता ने भी फैसले को गलत बताया था। बल्कि भाजपा के ही कुछ मंत्रियों के आरोप थे की ये फैसला सरकार ने उनसे पूछकर या समझाकर नहीं लिया। पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र का वो फैसला तीरथ सरकार ने खत्म कर दिया है। हालांकि बाद मे पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र का बयान आया था की उन्होने कोई भी फैसला बिना संगठन या किसी की राय जाने बिना नहीं लिया। वो फैसला था गैरसेण को तीसर मण्डल बनाने का । जो न ही उत्तराखंड मे भाजपा के कुछ विधायकों के गले उतरा और न ही मंत्रियों के बल्कि उत्तराखंड की जनता और विपक्ष का वार भी त्रिवेन्द्र सरकार को झेलना पड़ा था। ऐसा भी कहा जाता था की सीएम को कुर्सी से हटाने का मुख्य कारण भी यही था क्योंकि जिस दिन से ये फैसला लिया गया था उस दिन से त्रिवेन्द्र सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी।

को राज्य सरकार ने ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने के फैसले को खत्म कर दिया है। फिलहाल राज्य में दो ही कमिश्नरी रहेंगी। शुक्रवार रात को मुख्यमंत्री तीरथ रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। त्रिवेंद्र रावत सरकार ने चार मार्च, 21 को गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने का फैसला लिया था। इसमें चमोली,रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा व बागेश्वर जिले को शामिल किया गया था। इस बीच विरोध होने भाजपा हाईकमान ने राज्य में सत्ता परिवर्तन कर दिया है। हालांकि, सीएम तीरथ पहले ही गैरसैंण कमिश्नरी को खत्म करने के संकेत दे चुके थे,लेकिन आज कैबिनेट बैठक ने भी भाजपा की ही त्रिवेंद्र सरकार के इस फैसले को सिरे से खारिज करने पर मुहर लगा दी है।