हरिद्वार: जिला उपभोक्ता आयोग ने प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद और मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिद्वार को उपभोक्ता सेवा में कमी का दोषी पाया है। आयोग ने प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादराबाद और हरिद्वार के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को मुआवजे के रूप में साढ़े चार लाख, मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10 हजार रुपये और शिकायत खर्च व अधिवक्ता फीस के रूप में पांच हजार रुपये शिकायतकर्ता महिला को देने के आदेश दिए हैं।

शिकायतकर्ता महिला प्रतिभा पत्नी अर्जेस निवासी ग्राम शिवदासपुर उर्फ तेलीवाला रुड़की ने प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादराबाद और मुख्य चिकित्सा अधिकारी जनपद हरिद्वार के खिलाफ सितंबर 2019 को शिकायत दायर की थी। दायर शिकायत में बताया था कि उसने स्थानीय अस्पताल में नसबंदी का ऑपरेशन कराया था।
चिकित्सक ने उसे नसबंदी ऑपरेशन के बाद कभी भी गर्भधारण न होने का आश्वासन दिया था। लेकिन नसबंदी ऑपरेशन के बावजूद उसका गर्भ धारण हो गया था। जबकि शिकायतकर्ता महिला के पूर्व में छह बच्चे हैं। नसबंदी के बाद पैदा हुए बच्चे के भविष्य व शिक्षा पर आर्थिक बोझ बढ़ने की चिंता जाहिर की। जिसपर शिकायतकर्ता ने दोनों अधिकारियों से मुआवजे की मांग की थी। शिकायत की सुनवाई करने के बाद आयोग अध्यक्ष कंवर सेन, सदस्य विपिन कुमार और अंजना चड्ढा ने दोनों स्वास्थ्य अधिकारियों को उपभोक्ता सेवा में कमी और लापरवाही बरतने का दोषी ठहराया है।