पटना: कुमार चोरी हुई मोटरसाइकिल की बरामदगी और अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए शनिवार तड़के सीमावर्ती राज्य पश्चिम बंगाल में ग्वालपोखर थाना क्षेत्र के पंतापाड़ा गांव में छापेमारी करने गए थे, जहां ग्रामीणों ने पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी थी। यह खबर हृदय रोग से ग्रसित उनकी मां को नहीं दी गई थी। सूत्रों ने बताया कि जैसे ही पुलिस निरीक्षक अश्विनी कुमार का पार्थिव शरीर पूर्णिया जिले के जानकीपुर थाना क्षेत्र के पांचू मंडल टोला स्थित उनके पैतृक आवास पर पहुंचा तो हाहाकार मच गया। काफी कोशिशों के बाद भी उनकी मां उर्मिला देवी को पता चल ही गया और वह इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाई। अंतत: सदमाजद का भी निधन हो गया। शहीद अश्विनी कुमार और उनकी मां का आज करीब दो बजे गांव में ही अंतिम संस्कार होगा।
शहीद के पिता महेश्वरी प्रसाद का सात वर्ष पूर्व ही निधन हो गया था। पिछले तीन-चार सालों से अश्विनी कुमार का पूरा परिवार पटना के हनुमान नगर में किराए के मकान में रहता है। उन्हें तीन बच्चे हैं। पटना में उनकी पत्नी मीनू स्नेहलता, 15 साल की बड़ी बेटी नैंसी और दो जुड़वां बेटा-बेटी ग्रेसी एवं वंश (उम्र करीब छह साल) रहता है ।

किशनगंज थानाध्यक्ष को अकेला छोड़कर भागने वाले 7 पुलिसकर्मी सस्पेंड
पश्चिम बंगाल में छापेमारी करने गये किशनगंज थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार को भीड़ में छोड़कर जान बचाकर भागने पर वाले सर्किल इंस्पेक्टर मनीष कुमार व छह पुलिस कांस्टेबल को आइजी सुरेश प्रसाद चौधरी ने निलंबित कर दिया है। सस्पेंड होने वाले कांस्टेबल में राजू साहनी, अखिलेश्वर तिवारी, प्रमोद कुमार पासवान, उज्जवल कुमार पासवान, सुनील चौधरी व सुशील कुमार शामिल हैं। आइजी ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्य का निर्वाह विवेकपूर्ण ढंग से किया गया होता, तो संभवत: यह घटना नहीं घटती। इस कार्य में प्रथमदृष्टया इनलोगों की लापरवाही परिलक्षित होती है। इस लापरवाही के लिए सभी को तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन यापन भत्ता पर निलंबित किया जाता है। निलंबन की अवधि में इनका मुख्यालय पुलिस केंद्र किशनगंज होगा।
गौरतलब है कि मृतक के भाई प्रवीण कुमार उर्फ गुड्डू ने सवाल उठाते हुए कहा था कि छापेमारी में सर्किल इंस्पेक्टर सहित अन्य पुलिस बल के जवानों को खरोंच तक नहीं आयी, जबकि मेरे भाई की हत्या हो गयी। इससे साफ जाहिर है कि मेरे भाई बचाने के बजाय अन्य पदाधिकारी व जवान अपनी जान बचाकर भाग निकले और मेरा भाई तड़प-तड़पकर मर गया। परिजनों ने यह भी आशंका जतायी थी कि कहीं किसी ने छापेमारी टीम के जाने की पहले ही अपराधियों को इसकी सूचना तो नहीं दे दी थी।