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कैमूर में 9 साल की उम्र में सेविका बन गयी मां, जानिए क्या है मामला

...तो इस वजह से गांगुली ने पाकिस्तान के खिलाफ धोनी को नंबर 3 पर बैटिंग करने भेजा था

भभुआ कैमूर : क्या कोई महिला सेविका 9 साल की  उम्र में मां बन सकती है। सुनने में तो यह थोड़ा अटपटा लगता है। आप सुनकर हैरान हो रहे होंगे कि कैसे कोई महिला 9 साल की उम्र में मां बन सकती है। लेकिन यह हकीकत है। ऐसा बिहार में होता है। लेकिन वह महिला असल में 9 साल की उम्र में मां नहीं बनी है। ब्लिक वह कागजों में बनी है और इसी की बदौलत वह सेविका के रूप में बहाल हो गयी है। यह मामला बिहार के कैमूर जिले के दुर्गावती प्रखंड के दरौली गांव का है। जहां से आंगनबाड़ी सेविका की बहाली में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है।

यह मामला तब सामने आया जब दूसरे महिला अभ्यर्थी की 65 प्रतिशत अंक होने के बाद भी उसका नाम हटा कर 45 प्रतिशत अंक वाली अभ्यर्थी की सेविका के रूप में गाइडलाइंस का बिना पालन किये ही बहाल कर दी गयी। लेकिन जब लोगों ने 45 प्रतिशत अंक वाली सेविका के जन्मतिथि को देखा तो पता चला कि उसने अपनी जन्मतिथि 1995 दी थी। जबकि उसी ने अपनी बेटी की जन्मतिथि 2004 दे रही थी। जिसके बाद लोगों को समझ में आ गया कि बहाल सेविका द्वारा फर्जीवाड़ा कर सेविका में चयन हुई है। 

उसके जन्मतिथि में गड़बड़झाला किया गया है। फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आने के बाद इसकी शिकायत पीड़िता ने कैमूर डीएम बीडीओ और सीडीपीओ को लिखित रूप से 7 माह पहले ही की थी. फिर भी पीड़िता को 7 माह बाद न्याय नहीं मिला और उसे भटकना पड़ रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक, दुर्गावती प्रखंड के सावठ पंचायत के दरौली गांव में 7 माह पहले सेविका की पद पर पार्वती कुमारी को 45% अंक होने के बाद भी चयन किया गया था।जिसको लेकर दूसरी अभ्यर्थी संगीता कुमारी ने आरोप लगाया है कि मेरा 65% अंक होने के बाद भी मेरी बहाली नहीं की गई। जिस 45 प्रतिशत अंक वाली पार्वती कुमारी का चयन सेविका के रूप में हुई है।  उसके जन्मतिथि में भी गड़बड़ी किया गया है ताकि सेविका के रूप में चयन हो सकें। यह पूरी तरह फर्जीवाड़ा कर सेविका बहाली हुई है। 

उसका का कहना था उसने अपने जन्मतिथि 1995 का दिखाया है जबकि उसकी बेटी की जन्म तिथि 2004 दिखाया जा रहा है। ऐसे में सिर्फ 9 साल की उम्र में कैसे कोई महिला बच्चे को जन्म दे सकता है। यही नहीं उसका कम अंक होने के बाद भी नियम को ताक पर उसका चयन कैसे कर दिया गया। यह सवाल उठाया जा रहा है।इसके लिए 7 महीने से डीएम, बीडीओ और सीडीपीओ का आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी जा रही है। लेकिन आज तक कोई पहल व न्याय होता हुआ नहीं दिख रहा है।

वहीं इस मामले में महिला सुपरवाइजर का कहना था कि चयन हुई सेविका के उम्र को लेकर लोगों ने सवाल उठाया है कि मां और बेटी की उम्र में 9 साल का अन्तर है। यह जांच का मामला है। वहीं सीडीपीओ आशा दुबे का कहना था कि मामला संज्ञान में आया है। जन्मतिथि की जांच किया जा रहा है। जो भी मामला जांच के बाद पाया जायेगा। उसके अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी होगी। अगर मामला गलत पाया जाता है कार्रवाई होगी और वही सही अभ्यर्थी का चयन किया जायेगा। 

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Author: nirbhiknazar

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