देहारादून: उत्तराखंड में निज़ाम को बदले एक महीना हो चुका है। लेकिन सरकार और शासन में अभी भी असहजता की स्थिति है। राजनीति के गलियारों में भी निजाम बदलने के बाद पुराने सीएम के करीबी चेहरे और नए सीएम के करीबी चेहरों पर जोर आजमाइश जारी है। दरअसल गैरसेण में सत्र के बीचो बीच नाटकीय ढंग से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बुलाकर इस्तीफा दिलवाने के बाद प्रदेश के अधिकारियों मे भी असहजता की स्थिति उत्पन्न हो गई । कौन रहेगा कौन हटेगा सोशल मीडिया में बहुत तेजी से खबरों का सिलसिला जारी रहा ।
सरकार के शासन के वरिष्ठ नौकरशाह और पुलिस विभाग के मुखिया दोनों बड़े अधिकारियों के हटने और रहने की खबर की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया ऐसी स्थिति में और इस और सहजता के कारण प्रदेश का लगभग 2 महीने का काम काज बाधित रहा। उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में जब जब राज्य में अस्थिरता आई है इसका परिणाम राज्य की जनता को ही झलना पड़ा है है अब आलम यह है कि शासन में लंबे समय के बाद विगत दिनों शासन के लगभग दो दर्जन अधिकारियों के विभागों में फेरबदल कर दिया गया।

अब उत्तराखंड के 13 जिलों में जिलाधिकारी और कप्तान बदलने की कवायत पर कार्रवाई की जा रही है लेकिन फेरबदल के इस किस्त में उत्तराखंड के नए निजाम और पुराने निजाम के करीबी रहे अधिकारियों पर गाज गिरने की चर्चा खुलेआम हो रही है । हालांकि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पिछले दिनों हुए अधिकारियों के विभाग परिवर्तन में इसको बैलेंस करने की कोशिश जरूर की लेकिन पुराने निजाम के कुछ करीबियों को हल्का जरूर किया है ।
सचिवालय के अधिकारियों ने नाम नहीं छापने पर बताया कि प्रदेश में निजाम तो बदलते ही रहते हैं लेकिन हमारी निष्ठा तो हस्तिनापुर के सिंहासन के प्रति है। हस्तिनापुर के सिंहासन पर बैठने वाला हमारा निजाम के प्रति हम जवाब देह है और जो भी निजाम उस कुर्सी पर बैठेगा शासन उनकी अगुवाई में उनके सफल संचालन में चलेगा। इसमें किसी भी प्रकार की संशय का कोई मतलब ही नहीं है । अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठा व्यक्ति विशेष पर नहीं होती अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठा राज सिंहासन के प्रति होती है ।
अब लगभग यही हाल पार्टी के कार्यालय में भी देखा जा रहा है पार्टी कार्यालय में भी यही चर्चा है कि त्रिवेंद्र के करीबियों को दूर किया जाएगा और तीरथ के करीबियों को नजदीक लाया जाएगा लगभग यही सवाल पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं का भी है पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं का भी यही कहना है कि उनकी निष्ठा मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रति है पार्टी जिसे भी संगठन और सरकार का मुखिया बनायेगी दोनो मिलकर ही काम करते हैं।
इसमें अगर त्रिवेंद्र के करीबियों को दूर किया जाएगा तो ऐसे में चोट कहीं ना कहीं भारतीय जनता पार्टी के छवि को ही लगेगा और कहीं ना कहीं इसका नुकसान भारतीय जनता पार्टी को ही झेलना पड़ेगा । हालांकि नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत लंबे समय से राजनीति करते आ रहे हैं और एक मझे हुए राजनेता है तीरथ सिंह रावत ने यह साफ संदेश दे दिया है कि समय कम और काम ज्यादा है ऐसी स्थिति में उनकी पार्टी बीजेपी को उत्तराखंड में फिर से लेकर के आने की है। तीरथ सिंह रावत के फैसले कहीं से भी बदले की भावना से ओतप्रोत नहीं दिखते मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने चीजों को बैलेंस करने की कोशिश तो जरूर की है । अब अधिकारी उनको भरोसा दिलाना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री जी हमारी निष्ठा तो हस्तिनापुर के राज सिंहासन के प्रति है।