नई दिल्ली : भारत कोरोना के दूसरी लहर की ज़द में है। कोरोना के हर रोज़ डेढ़ लाख से ज़्यादा मरीज़ सामने आ रहे हैं। इस बीच हरिद्वार में कुंभ की धूम है। यहां लाखों लोगों का जमावड़ा लगा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार दोपहर तक कोरोना नियमों को दरकिनार कर करीब 21 लाख लोगों ने गंगा में ‘आस्था की डुबकी लगाई।’ जबकि कुल 35 लाख लोगों ने गंगा मे स्नान किया। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच राज्य अपने स्तर पर नियम लागू कर रहे हैं। मीडिया समूंह का एक बड़ा हिस्सा दावा कर रहा है कि मेले में कोरोना के नियमों का पालन किया जा रहा है जबकि कुम्भ मेले के आईजी संजय गुंजयाल पहले ही साफ कर चुके हैं की कि घाट पर सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करना बहुत ज़्यादा मुश्किल है।
एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना टेस्टिंग में भी लापरवाही बरती जा रही है। स्नान के लिए आ रहे लाखों लोगों में केवल कुछ लोगों की ही टेस्टिंग की जा रही है जबकि अन्य लोगों को मास्क पहना देख, थर्मल स्क्रिनिंग कर या फिर नेगेटिव टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। सोमवार को मेले में दर्शन के लिए उमड़ी 35 लाख लोगों की भीड़ में से रविवार दोपहर 11.30 बजे से सोमवार शाम 5 बजे तक सिर्फ 18,169 लोगों का कोरोना टेस्ट किया गया। मंगलवार को भी देहरादून जिले में 6904 सैंपलों की जांच की गई, जिसमें 775 मरीज मिले। वहीं, हरिद्वार जिले में 31310 सैंपलों की जांच में 594 संक्रमित मिले। यानि अगर और ज़्यादा टेस्टिंग की जाती तो और ज़्यादा मरीज निकलते।

राज्य में कोरोना के एक्टिव केस बढ़ कर करीब 12000 के पार पहुंच गए हैं है। दूसरी ओर कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इस तरह के बड़े उत्सव के आयोजन पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। मेले का आयोजन ऐसे समय किया गया है जब देश में कोरोना का डबल म्यूटेंट वैरिएंट पाया जा चुका है। कई राज्यों की महामारी से निपटने की क्षमता कम हो गई है और देश के कई हिस्सों में शमशान घाटों पर कोरोना से मारे गए लोगों के शवों का ढेर इकट्ठा हो रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी संक्रमण के तेज़ी से फैलने के बीच कुंभ मेले के आयोजन को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इन सब के बीच पहले लोगों को बड़ी संख्या में कुंभ में भाग लेने के लिए कहा था। बाद मे हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कोरोना टेस्टिंग बढ़ाई गई। उन्होंने कहा था कि लोगों को बड़ी संख्या में स्नान के लिए हरिद्वार आना चाहिए और किसी को भी कोविड 19 के नाम पर रोका नहीं जाएगा।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने मंगलवार को यह आशंका व्यक्त की कि हरिद्वार के कुंभ मेले से लौटने वाले लोग कोविड-19 संक्रमण के संभावित वाहक बन जाएंगे, जिससे खतरा पैदा होगा। राउत की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब एक दिन पहले लाखों भक्तों ने हरिद्वार में गंगा नदी के विभिन्न घाटों पर पवित्र डुबकी लगाई।राउत ने कहा, ‘‘त्योहारों और धार्मिक समारोहों पर प्रतिबंध लगाना शिवसेना के लिए पीड़ादायक है, लेकिन पार्टी में लोगों के जीवन को बचाने के लिए ऐसा करने का साहस है। हमारी प्राथमिकता अधिक से अधिक लोगों की जान बचाना है। मेरा मानना है कि कुंभ मेला से आने वाले लोग कोरोना वायरस के संक्रमण को और अधिक फैला सकते हैं, जिससे तबाही होगी।’’
इससे पहले, पत्रकारों से बात करते हुए, मुंबई के प्रभारी मंत्री और कांग्रेस नेता असलम शेख ने कहा था कि राज्य सरकार को कुंभ मेले से लौटने वाले लोगों को लेकर दिशा-निर्देश तय करने होंगे, क्योंकि समारोह के दौरान कोविड-19 के उचित व्यवहार का पालन नहीं किया गया। कोविड-19 मामलों और इससे हुई मौतों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र देश में सबसे अधिक प्रभावित राज्य है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सोमवार तक राज्य में कोविड-19 के कुल 34,58,996 मामले आ चुके हैं, जबकि 58,245 मौतें हो चुकी हैं।