देहारादून : सल्ट विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के निधन के साथ ही वर्तमान विधानसभा के लिए उपचुनाव में आज वोटिंग जारी है। पुलिस की मौजदूगी में वोटर्स मतदान स्थल में अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं ताकि वह अपने पसंदीदा नेता को सदन में भेज सकें। प्रदेश में कोरोना की वजह से मतदान की रफ्तार धीमी जरूर है लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि समय के साथ ही वोटर अपने-अपने घरों से निकलकर वोट डालने भारी संख्या में आगे आएंगे।

भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के निधन से रिक्त हुई विधानसभा की सल्ट सीट के उपचुनाव को वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की रिहर्सल के तौर पर भी देखा जा रहा है। उपचुनाव में जिस भी पार्टी के सिर जीत का सेहरा सजेगा, वह बढ़े मनोबल के साथ विधानसभा चुनाव में उतरेगी। इस सबको देखते हुए प्रदेश में सत्तासीन भाजपा ने थराली व पिथौरागढ़ की भांति सल्ट में भी सहानुभूति कार्ड चला है। भाजपा ने यहां के दिवंगत विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के भाई महेश जीना पर दांव खेला है। भाजपा के नजरिये से देखें तो यह चुनाव उसके लिए साख का सवाल भी है। इसमें भाजपा सरकार के पिछले चार साल के कामकाज पर जनता की मुहर लगनी है। साथ ही सरकार और संगठन में हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक के कौशल की परीक्षा भी होनी है। यही वजह भी है कि भाजपा ने चुनाव में पूरी ताकत झोंके रखी।

कांग्रेस ने सल्ट उपचुनाव में पिछले चुनाव में काफी कम अंतर से हारी गंगा पंचोली को मैदान में उतारा है। कांग्रेस भी सल्ट के माध्यम से संजीवनी की तलाश में है। उसके सामने अपनी खिसकती जमीन बचाने की चुनौती है। दरअसल, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। विधानसभा में उसके विधायकों की 11 की संख्या इसकी तस्दीक करती है। ऐसे में कांग्रेस ने भी पूरा जोर उपचुनाव में लगाए रखा।