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लालू को  मिली जमानत, बेटी बोली मेरा रमजान और नवरात्र सफल हुआ, 5 मामलों में से 4 में पहले ही मिल चुकी है जमानत

 

पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को रांची हाईकोर्ट से कई दिनों तक चली सुनवाई के बाद जमानत मिल ही गई। इसके साथ ही लालू यादव तीन साल बाद जेल से रिहा हो सकेंगे। लालू को जमानत मिलने से राजद समर्थकों में खुशी की लहर है। राजद पार्टी के ट्वीटर हैंडलर से जानकारी दी गई कि- आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लालू प्रसाद जी को ज़मानत मिली।

वहीं लालू की रिहाई के लिए नवरात्र और रोजा रखने की घोषणा करने वाली लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने कहा कि- मेरा रमजान और नवरात्र सफल हुआ। आज मुझे ऊपर वाले के तरफ से ईदी मिल  गई।

 

इन शर्तों पर लालू को जमानत

लालू को जेल से बाहर आने के लिए एक लाख रुपये के निजी मुचलके का बांड भरना होगा. साथ ही 5-5 लाख का जुर्माना भी जमा करना होगा।

वे झारखंड हाईकोर्ट की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा पाएंगे।

अदालत की जानकारी के बिना अपना पता-ठिकाना नहीं बदल पाएंगे।

अपना मोबाइल नंबर भी कोर्ट की अनुमत‍ि के बिना नहीं बदल सकेंगे।

5 मामलों में से 4 में पहले ही मिल चुकी है जमानत

लालू प्रसाद के खिलाफ झारखंड में पांच मामले चल रहे थे। चार मामलों में उन्हें जमानत मिल गयी है। पांचवा मामला डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित है। सीबीआई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अभी चल रही है। जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने लालू प्रसाद को एक लाख के निजी मुचलके, दस लाख जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है। लालू प्रसाद को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा। बिना कोर्ट की अनुमति के वे विदेश नहीं जा सकेंगे। उन्हें अपना मोबाइल नंबर और पता भी नहीं बदलने का निर्देश अदालत ने दिया है।

लालू प्रसाद ने अपने स्वास्थ्य और दुमका कोषागार केस में मिली आधी सजा काट लेने के आधार पर जमानत मांगी थी। लालू की ओर से पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने  अदालत को बताया कि सीबीआई कोर्ट ने उन्हें सात साल की सजा सुनायी है। प्रसाद ने छह अप्रैल को ही 42 माह जेल में काट लिए हैं। उनकी आधी सजा पूरी हो गयी है। इस कारण उन्हें जमानत प्रदान की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी आधी सजा पूरी करने के बाद जमानत प्रदान करने का कई मामलों में आदेश दिया है।

 

सीबीआई ने किया जमानत का विरोध

सीबीआई की ओर से लालू प्रसाद को जमानत का विरोध किया गया। सीबीआई का कहना था कि दुमका कोषागार में लालू प्रसाद को सीबीआई कोर्ट ने आईपीसी में सात और पीसी एक्ट के तहत सात साल की सजा सुनायी है। सीबीआई कोर्ट ने दोनों सजा अलग-अलग चलाने का आदेश दिया है। ऐसे में लालू प्रसाद को दुमका कोषागार से अवैध निकासी में कुल 14 साल की सजा मिली है। सात साल जेल में बिताने के बाद ही उनकी आधी सजा पूरी होगी। इस तरह उनकी आधी सजा पूरी नहीं हुई है। इसलिए वह जमानत के हकदार नहीं है।

सीबीआई की इस दलील का कपिल सिब्बल ने विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले में कई और अन्य आरोपियों को सात साल की सजा मान कर ही जमानत प्रदान की गयी है। उन मामलों में सीबीआई ने यह दलील नहीं दी थी, फिर लालू प्रसाद के मामले में यह नयी दलील नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने भी सीबीआई के इस दलील को नहीं माना और लालू प्रसाद को कुछ शर्तों के साथ जमानत प्रदान कर दी।

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Author: nirbhiknazar

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