Nirbhik Nazar

भारत-चीन सीमा पर जोशीमठ के पास फटा ग्लेशियर, सीएम बोले निरंतर जिला प्रशासन और BRO के सम्पर्क में हूं

चमोली: उत्तराखंड मे एक तरफ तो कोरना के कहर ने सरकार की नाक मे दम कर रखा है वहीं दूसरी तरफ एक बार फिर मौसम कहर ढा रहा है ऊंचे इलाकों में भारी बर्फबारी हो रही है, जिससे कि फिर ग्लेशियर फाड़ तबाही की खबर सामने आ रही है। कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच उत्तराखंड से तबाही की दस्तक देती एक बड़ी खबर सामने आ रही हैं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कमांडर कर्नल मनीष कपिल ने बताया कि भारत-चीन सीमा पर उत्तराखंड के जोशीमठ के पास एक ग्लेशियर फटा है। फिलहाल इस घटना में किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सीमा क्षेत्र सुमना में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) कैंप के समीप ग्लेशियर टूटकर मलारी-सुमना सड़क पर आ गया है। चूंकि यहां आबादी नहीं है, सिर्फ सेना की आवाजाही रहती है, इसलिए अभी किसी नुकसान के बारे में पता नहीं चल पाया है। घटना शुक्रवार देर रात की है। बता दें कि बॉर्डर पर सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीआरओ के मजदूर सड़क निर्माण कार्य में जुटे हुए थे।

बताया जा रहा है कि इसके टूटने से ऋषिगंगा नदी का जलस्तर बढ़ सकता है। जिसके चलते गंभीर समस्याएं आ सकती हैं। इसको देखते हुए सीएम तीरथ सिंह रावत ने भी अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं सीएम तीरथ सिंह रावत ने कहा कि नीती घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटने की सूचना मिली है। इस संबंध में मैंने एलर्ट जारी कर दिया है। मैं निरंतर जिला प्रशासन और बीआरओ के सम्पर्क में हूं। जिला प्रशासन को मामले की पूरी जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दे दिए हैं। एनटीपीसी एवं अन्य परियोजनाओं में रात के समय काम रोकने के आदेश दे दिए हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

बता दें कि 7 फरवरी को ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा में आई बाढ़ में 205 लोग लापता हो गए थे। इनमें से 79 शव ही मिल पाए हैं। हादसे में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि ऋषिगंगा में आई जल प्रलय का वेग अलकनंदा नदी में आते-आते थम गया। इस कारण नदी तट पर बसे शहरों और कस्बे इसके प्रकोप से बच गए।

तपोवन से लेकर हरिद्वार में स्थित गंगा के मैदानी तटों को खाली कराया गया। लेकिन राहत की बात यह रही कि ऋषिगंगा और धौली गंगा की संकरी और तेज ढलान वाली घाटी में उफानाती बाढ़, अलकनंदा की अपेक्षाकृत ज्यादा चौड़ी तटों पर आकर शांत होने लगी। यही कराण है कि जानमाल का नुकसान अलकनंदा तट पर ही देखने को नहीं मिला।

चूंकि वहां सड़क बन रही है, इसलिए मजदूरों के फंसे होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। बता दें कि यहां लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण ऋषिगंगा और धौलीगंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। इस वजह से तपोवन और रैणी के साथ छह गांवों के लोगों में डर बैठा हुआ है।

nirbhiknazar
Author: nirbhiknazar

Live Cricket Score
Astro
000000

Live News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *