रांची: महाराष्ट्र से लेकर गुजरात, मध्य प्रदेश से लेकर देश की राजधानी दिल्ली में मेडिकल आक्सीजन को लेकर हाहाकार मचा है। आक्सीजन की कमी के कारण हजारों कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हो गई। लेकिन जमशेदपुर इस मामले में भाग्यशाली है। यहां मेडिकल आक्सीजन की कोई कमी नहीं है। आज सभी राज्य जमशेदपुर सहित अन्य स्टील सिटी की ओर आस भरी नजरें टिकाए बैठे हैं। आज जमशेदपुर देश को ”आक्सीजन” दे रहा है।
टाटा स्टील के प्रवक्ता के अनुसार फिलहाल कंपनी रोजाना 300 टन लिक्विड मेडिकल आक्सीजन उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, बिहार व बंगाल स्थित अस्पतालों को भेज रही है। जमशेदपुर में कंपनी टीएमएच, एमजीएम मेडिकल कॉलेज व अस्पताल, टिनप्लेट हॉस्पीटल, टाटा मोटर्स व ब्रह्मानंद अस्पताल में आक्सीजन की सप्लाई कर रही है। टाटा स्टील की प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र सरकार ने स्टील कंपनियों में आक्सीजन के उत्पादन, खपत व स्टॉक की समीक्षा करने के लिए विशेष कमेटी का गठन किया है। उन्होंने प्रत्येक स्टील प्लांट से विभिन्न राज्यों को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजिन का वितरण आवंटित किया है। टाटा स्टील आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार हैं, हालांकि, ऑक्सीजन की ढुलाई और परिवहन के लिए कंटेनरों और ट्रेलरों की कमी है। हम उम्मीद करते हैं कि परिवहन समस्या का जल्द समाधान हो जाएगा, ताकि आक्सीजन गंतव्य जगह पर सही समय पर पहुंच सके। हम वैकल्पिक साधनों पर भी काम कर रहे हैं।

जमशेदपुर में आक्सीजन के छह प्लांट
इसका मुख्य कारण लौहनगरी में स्टील प्लांट होना है। टाटा स्टील में सैकड़ों मीट्रिक टन लिक्विड आक्सीजन की रोजाना खपत होती है। इसलिए जमशेदपुर में छह प्लांट लगे हैं। इसमें लिंडे इंडिया लिमिटेड के बर्मामाइंस व साकची प्लांट के अलावा आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में बिहार एयर वाटर प्रोडक्टस प्रा. लिमिटेड, स्पॉक्सी गैसेस प्रा. लि., न्यू कार्बोनिक गैसेस प्रा. लि. व जमशेदपुर ऑक्सीजन प्रा. लि. शामिल हैं। सिर्फ लिंडे की ही उत्पादन क्षमता 5000 टन है। आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की अन्य पांच कंपनियों में 150 से 200 टन प्रतिदिन उत्पादन की क्षमता है, जो फिलहाल 50 से 100 टन ही उत्पादन कर रही हैं। सामान्य दिनों में जमशेदपुर से ही बंगाल व ओडिशा के सीमावर्ती अस्पतालाें में मेडिकल आॅक्सीजन की आपूर्ति की जाती है। टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा की पहल पर टाटा स्टील देश भर में 150-200 टन मेडिकल आक्सीजन की रोजाना सप्लाई कर रही है।
आक्सीजन तो है पर खाली सिलिंडर की भारी कमी
सिंहभूम चैंबर आफ कॉमर्स के अध्यक्ष अशोक भालोटिया का कहना है कि जमशेदपुर में लिक्विड ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। कमी है तो व्यक्तिगत उपयोग में आने वाले सिलेंडर की। ऑक्सीजन सिलेंडर का उत्पादन सबसे ज्यादा गुजरात में होता है। यहां वितरकों के पास भी छोटे सिलेंडर की कमी है। अमूमन छोटे सिलेंडर लेने वाले उपयोग के बाद भी लौटाते नहीं हैं। इसकी वजह से ज्यादा दिक्कत है। बड़े अस्पतालों में सेंट्रलाइज्ड चैंबर व पाइपलाइन की व्यवस्था है, इसलिए उन्हें दिक्कत नहीं है। छोटे अस्पताल व नर्सिंग होम में 30 किलो वाले सिलेंडर की ज्यादा खपत है। मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर एक, दो, पांच व 30 किलो का होता है। सरकार को सिलेंडर खरीदकर उपलब्ध कराना चाहिए।

इन राज्यों में है मेडिकल आक्सीजन की कमी
मेडिकल ऑक्सीजन की सबसे ज़्यादा कमी 12 कोरोना प्रभावित राज्यों में है जिसमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान शामिल हैं।