देहरादून: स्कूल बंदी के दौरान फीस को लेकर भी सरकार ने रविवार को विधिवत आदेश जारी कर दिया। शिक्षा सचिव के अनुसार स्कूल बंद रहने की अवधि में प्राइवेट स्कूल केवल टयूशन फीस लेंगे। जो अभिभावक फीस देने में सक्षम नहीं होंगे, वो स्कूलों से फीस जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांग सकते हैं। लेकिन, किसी भी परिस्थिति में फीस देने में देरी की वजह से छात्र को स्कूल से नहीं हटाया जा सकता। सरकारी, अर्द्धसरकारी अधिकारी-कर्मचारी को अपने बच्चों की फीस को नियमित रूप से अदा करना होगा। मालूम हो कि शिक्षा सचिव ने बीते रोज ही इस आदेश के जारी करने के संकेत दे दिए थे। यह आदेश डे और बोर्डिंग दोनों स्कूलों पर लागू होंगे।

पिछले वर्ष कोरोना संकट को देखते हुए विद्यालय बंद रहने के कारण स्कूलों में आनलाइन पढ़ाई हुई थी। इसे देखते हुए सरकार ने छात्र-छात्राओं से सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के आदेश दिए थे। इस बार भी परिस्थितियां पिछले साल जैसी हो गई हैं। नतीजतन प्रदेशभर में सभी शिक्षण संस्थानों को बंद किया गया है। अधिकांश संस्थान आनलाइन माध्यम से पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। इस बीच शासन के संज्ञान में जानकारी आई कि कुछ निजी स्कूल अभिभावकों पर बच्चों की पूरी फीस जमा कराने का दबाव बना रहे हैं। शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए निजी स्कूलों के लिए शुल्क से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं।सचिव विद्यालयी शिक्षा आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से जारी आदेश के मुताबिक आनलाइन पढ़ाई कराने पर ट्यूशन फीस के अलावा अन्य किसी प्रकार का शुल्क अभिभावकों से नहीं लिया जाएगा।

आनलाइन पढ़ाई का लाभ लेने के बावजूद शुल्क देने में असमर्थ बच्चों के अभिभावक कारणों का उल्लेख करते हुए संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य अथवा प्रबंध समिति से शुल्क जमा कराने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध कर सकते हैं। किसी भी परिस्थिति में छात्रों को शुल्क जमा करने में हुए विलंब के कारण स्कूल से निकाला नहीं जाएगा। ये आदेश सभी निजी और डे-बोर्डिंग स्कूलों पर भी समान रूप से लागू होंगे। स्कूल बंद रहने के बावजूद पूरा शुल्क जमा कराने का दबाव बना रहे निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावकों को सरकार ने राहत दे दी है। विद्यालय बंद रहने की अवधि में आनलाइन अथवा अन्य संचार माध्यमों से पढ़ाई कराने वाले निजी स्कूल अब केवल ट्यूशन फीस ही ले पाएंगे।