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उत्तराखंड में चारधाम में होने वाले आयोजनों पर हाईकोर्ट ने की नाराजगी जाहिर, हरीश रावत ने कही ये बात

नैनीताल: कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच उत्तराखंड में चारधाम में होने वाले आयोजनों पर नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से अपनी नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने कोविड महामारी के दौरान कुंभ मेला और चारधाम यात्रा जैसे भीड़ वाले धार्मिक आयोजनों को करवाने और इस दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पालन करवाने में असफल रहने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है।

कोर्ट ने पूछा- कौन कर रहा निगरानी?

मुख्य न्यायाधीश राघवेंद्र सिंह चौहान और जस्टिस आलोक वर्मा की पीठ ने कहा कि इन धार्मिक आयोजनों के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का घोर उल्लंघन होने के चलते राज्य को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया “पहले हमने कुंभ मेला में गलती की, उसके बाद चारधाम यात्रा में कर रहे हैं। हम क्यों बार-बार खुद को शर्मिंदा कर रहे हैं।” कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सोशल मीडिया पर ऐसे बहुत सारे वीडियो सामने आए हैं जिसमें बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम जैसे स्थलों पर बड़ी संख्या में पुजारी बिना सोशल डिस्टेंसिंग के घूमते नजर आ रहे हैं। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा “इसे कौन देख रहा है या फिर सब कुछ पुजारयों के भरोसे छोड़ दिया गया है? क्या हो अगर पुजारियों के बीच कोरोना वायरस फैल जाए? यहां तक कि अगर देवता की पूजा भी हो रही हो तो आप 20 पुजारियों को एक छोटे से कमरे में जाने की अनुमति नहीं दे सकते।” कोर्ट ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सरकार को अदालत के बजाय उल्लंघन करने वालों से सवाल पूछने चाहिए।

हरीश रावत ने किया ट्वीट

कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने में राज्य सरकार के प्रयासों की विफलता पर या अपर्याप्त पर जो कुछ माननीय हाईकोर्ट ने कहा है वो राज्य सरकार के लिये एक बड़ी चेतावनी है। माननीय मुख्यमंत्री जी व माननीय मंत्रीगणों को उस चेतावनी को अत्यधिक गम्भीरता से लेना चाहिये, उन टिप्पणियों पर उनको बैठकर योजनाबद्ध तरीके से कहां-कहां कमियां रह गई हैं, उन कमियों को दूर करना चाहिये। इस समय एक बात बिल्कुल साफ दिखाई दे रही है, इतने लम्बे कर्फ्यू के बाद शहरीय क्षेत्रों में संक्रमण की वृद्धि दर थोड़ी घटी है, अपेक्षित नहीं घटी है और उल्टा ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण की दर निरन्तर बढ़ रही है, जो सीमान्त क्षेत्र हैं उनमें संक्रमण की वृद्धि दर यह जताती है कि उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कोई दस्तक नहीं रही है। कोरोना के मरीजों तक, संक्रमितों लोगों तक पहुंचने का जो प्रयास होना चाहिये था, वो प्रयास नहीं हुआ है।

मैंने, मुख्यमंत्री जी से दो आग्रह किये थे, पहला- जिन्होंने अपनी आजीविका खो दी है, जो संक्रमित भी हैं उन तक आर्थिक मदद पहुंचायें, दो हजार रूपये कहा था, एक ही हजार पहुंचा देते और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार तक एक हजार रूपया, आखिर सैनिटाइजर, मास्क, ये सब चीजों जो है ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिये ऐसा नहीं है कि सब लोग इसका भार वहन कर सकते हैं और मैं तो गांव का व्यक्ति हॅू, एक परिवार एक ही साबुन को यूज करता है, यदि परिवार का कोई व्यक्ति संक्रमित हो जा रहा है तो टाॅयलेट भी एक ही यूज हो रहा है, बहुत सारी समस्याएं हैं, इसलिये मैंने आइसोलेशन होम की बात भी कही कि आप हर गांव के अन्दर खाली पड़े हुये एक-दो घरों को आइसोलेशन होम बना दीजिये। चिन्हित करने के लिये जो आपने कदम घोषित किये, माननीय मुख्यमंत्री जी या उनके मुख्य सचिव महोदय ने वो कदम ऐसा लग रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आगे नहीं बड़े हैं और कहीं बड़े भी हैं तो आधे-अधूरे तरीके से बड़े हैं।

 

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Author: nirbhiknazar

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