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नेटवर्क से जूझ रहे थे लोग, फोन की घंटी बजते ही हो गए मदहोश, खुश हो गए पिथौरागढ़ के ग्रामीण, पढ़िये पूरी खबर

पिथौरागढ़. उत्तराखंड के चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ जनपद के ग्रामीणों को अब नेपाल के मोबाइल नेटवर्क के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. केंद्र सरकार की ओर से इन गांवों को मोबाइल नेटवर्क से जोड़ने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है. संचार क्षेत्र से जुड़े भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और निजी दूरसंचार कंपनी जियो को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है. कुल 195 गांवों को मोबाइल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है. बीएएनएल को 141 और जियो कंपनी को 54 गांवों को मोबाइल नेटवर्क से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके तहत दारमा घाटी में तीन गांव दर, बोंगलिंग और रांथी में मोबाइल नेटवर्क शुरू हो गया है, जोकि हजारों की आबादी को राहत पहुंचा रहा है.

पिथौरागढ़ में अभी तक 200 से ज्यादा गांव संचार सुविधा से कोसों दूर हैं. कहीं, संचार सेवा सैटेलाइट फोन, वीसेट और नेपाल के नेटवर्क के सहारे है, तो कहीं ग्रामीणों को संदेश पहुंचाने के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ता है. बरसात का मौसम नजदीक है, जिसको देखते हुए पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान ने इस कार्य की समीक्षा करते हुए संचार कंपनियों को युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं.

दारमा घाटी में एक सप्ताह के भीतर टावर लगाने के आदेश

जियो कंपनी को मानसून के मद्देनजर दारमा घाटी में एक सप्ताह के भीतर टावर लगाने के निर्देश दिए गए थे, जिस पर अमल करते हुए घाटी के तीन गांवों में मोबाइल टावर एक्टिवेट हो गए हैं. यहां 18 टावर अभी और लगने हैं. जिलाधिकारी आशीष चौहान ने जल्द ही अन्य क्षेत्रों में भी मोबाइल टावर लगाने की बात कही है.

गौरतलब है कि आजादी के बाद से ही पिथौरागढ़ में तमाम ऐसे दुर्गम इलाके हैं, जो अभी भी विषम परिस्थितियों में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं और मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं. जहां न तो सड़क है, न संचार है और न ही उचित शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं हैं. ऐसे हालातों में संचार से जुड़ने के बाद यहां के लोगों को कुछ राहत तो जरूर मिलेगी.

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Author: nirbhiknazar

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