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तुमने अपनी बहन के लिए टीवी और फ्रिज दिया है, मुझे दहेज मे बाइक चाहिए…! देखें बेशर्म दूल्हे की मांग का viral video

न्यूज़ डेस्क: दहेज क्या है? इस शब्द का अर्थ विवाह के अवसर पर वधू पक्ष द्वारा वर पक्ष को दिया जाने वाला धन, रुपया आदि है. इसका मतलब बताने की जरूरत नहीं है लेकिन फिर भी लोगों को बार-बार याद दिलाना पड़ता है क्योंकि आज भी समाज में किसी भी पिता की बेटी बिना दहेज के घर की चौखट नहीं लांघ सकती. इस समाज में, दूल्हे की दरें (दाम) बढ़ गई हैं, लड़के की स्थिति जितनी अधिक होगी, दहेज उतना ही अधिक होगा. ये तय करने वाले लोग किसी और दुनिया के नहीं बल्कि इसी दुनिया के वासी हैं.

हम आपके साथ एक वीडियो शेयर करने जा रहे हैं, जिसमें शादी के दिन दूल्हा इस बात पर लड़ रहा है कि उसे दहेज में बाइक नहीं मिली है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वहां मौजूद लोग दूल्हे को समझाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन दूल्हे को बाइक चाहिए जबकि वीडियो में देखा जा सकता है कि दूल्हे से कहा जा रहा है कि उसे फ्रिज, अलमारी, सोफा सेट दिया गया और क्या चाहिए. अब आप क्या चाहते हैं? दूल्हा बेशर्मी से कहता है कि ये सब हमारे लिए थोड़े दिए हैं, ये सब तो आप अपनी बहन के लिए दिए हैं.

एक गरीब परिवार पर टूटता है दुखों का पहाड़

एक अमीर आदमी अपनी बेटी को खुशी-खुशी विदा कर देता है, लेकिन एक गरीब पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है, जिसके पास साइकिल देने के लिए पैसे नहीं हैं. उसे सोचना होगा कि वह अपनी बेटी की शादी कैसे करे? हालांकि कानूनी तौर पर यह एक अपराध है, लेकिन यह अपराध हर वह पिता करता है जिसका बेटा होता है.

दहेज क्यों लेना है

अब सवाल यह है कि दहेज क्यों दें? एक लड़की अपनी मां, भाई, पिता और परिवार को घर छोड़कर एक पराये घर में जाती है, जहां उसके लिए सब कुछ नया होता है. एक पिता भरोसे के आधार पर अपनी बेटी का हाथ किसी पराये आदमी को सौंप देता है, लेकिन उस पराये आदमी का यह कर्तव्य नहीं है कि वह अपने पिता से पूछे कि दहेज क्यों लेना है? जो लड़का इतना सुलझा हुआ है, क्या उसके घर में पहले से ही टीवी, फ्रिज, एसी, बेड और सोफा नहीं है? उन लड़कों को समझना होगा कि हम क्या कर रहे हैं? अगर उनके माता-पिता सहमत नहीं हैं तो समझाएं कि यह सही नहीं है.

इसलिए मारी जाती है बेटियां

पहले आप सुनते थे कि बेटी को पैदा होते ही मार दिया जाता था या भ्रूण हत्या कर दी जाती थी. ऐसा क्यों है? इसका सीधा सा उत्तर यह है कि बेटी को बोझ समझा जाता था क्योंकि गरीब पिता के पास इतने पैसे नहीं होते थे कि बड़ी होने पर उसकी शादी कर सकें. हालांकि समय के साथ चीजें बदली हैं, लेकिन इतनी नहीं कि हम इसे सही कह सकें. आज भी समाज में ऐसे दहेज लोभी लोग हैं जो पैसों के लालच में यह भूल जाते हैं कि वे एक नए रिश्ते की शुरुआत कर रहे हैं.

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Author: nirbhiknazar

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