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सीएम त्रिवेंद्र ने भी दिया इस्तीफा, उत्तराखंड मे BJP के किसी भी मुख्यमंत्री ने नहीं पूरा किया 5 वर्ष का कार्यकाल

स्पेशल रिपोर्ट 

देहारादून:  सीएम त्रिवेंद्र ने आज मंगलवार को दोपहर बाद 4 बजे राज्यपाल बेबी रानी मौर्या से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए रावत ने कहा कि मैंने अपना त्यागपत्र राज्यपाल को सौंप दिया है। बीजेपी में जो भी फैसले होते हैं, वो सामूहिक विचार के बाद होते हैं। इस्तीफा देने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, ‘मैं लंबे समय से राजनीति कर रहा हूं। संघ से लेकर बीजेपी को दिया मैंने प्रचार किया। मुझे मुख्यमंत्री के तौर पर 4 साल काम करने का मौका मिला। मेरी पार्टी ने मुझे स्वर्णिम अवसर दिया। आगे सीएम ने कहा की मैं उत्तराखंड के उस गाँव मे पैदा हुआ जहां सिर्फ 7-8 परिवार ही रहते थे। उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता एक पूर्व सैनिक थे। बीजेपी में ही यह संभव था कि एक छोटे से गांव के अति साधारण परिवार के एक पार्टी के कार्यकर्ता को इतना बड़ा सम्मान दिया। 4 साल मुझे सेवा करने का मौका दिया। सामूहिक रुप से यह निर्णय लिया कि मुझे अब किसी और को यह मौका देना चाहिए.’ उन्होंने कहा कि 4 साल पूरा होने में 9 दिन रह गए हैं। इतना मौका मुझे दिया गया। मैं प्रदेश वासियों का धन्यवाद करना चाहता हूं।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय उत्तराखंड में पहली बार भाजपा सरकार बनी थी। उत्तरप्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनी। इस दौरान दो साल के भीतर ही दो मुख्यमंत्री बन गए। सबसे पहले नित्यानंद स्वामी 9 नवंबर 2000 को मुख्यमंत्री बने। इसके एक साल बाद भाजपा के नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्च खोल दिया। उन्हें 29 अक्टूबर 2001 को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद भाजपा ने उस समय के दिग्गज नेता भगत सिंह कोश्यारी को विधायक दल का नेता चुना।

कोशियारी ने 30 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद वह 1 मार्च 2002 तक राज्य की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहे। 2002 में विधानसभा चुनाव हुए। इसमें भाजपा कोश्यारी के नेतृत्व में राज्य का चुनाव लड़ी थी। इस चुनाव में सत्ता खिसकर कांग्रेस हाथ चली गई। कोश्यारी 123 दिन तक ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। 2002 चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री बने और पांच साल, यानी 2007 तक मुख्यमंत्री रहे।

2007 में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा को राज्य में पूर्ण बहुमत मिला। इस दौरान पांच साल के कार्यकाल में तीन बार मुख्यमंत्री का चेहरा बदला गया। 8 मार्च 2007 को भाजपा ने भुवनचंद्र खंडूरी मुख्यमंत्री बने, लेकिन 23 जून 2009 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद उनकी जगह 24 जून 2009 को भाजपा ने रमेश पोखरियाल निशंक को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन चुनाव से 4 महीने पहले उनकी कुर्सी चली गई। उनकी जगह दोबारा 10 सितंबर 2011 को भुवनचंद्र खंडूरी को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन 2012 के चुनाव में भाजपा की वापसी नहीं हुई। कांग्रेस की सरकार बनी।

5 साल में दो मुख्यमंत्री बदले गए। 13 मार्च 2012 को विजय बहुगुणा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, इसके दो साल बाद उन्हें कुर्सी छोड़ने पड़ी। 1 फरवरी 2014 को हरीश रावत मुख्यमंत्री बने, लेकिन पार्टी की अंदर खाने की राजनीति से जूझ रहे रावत को विधायकों की बगावत के बाद पद से इस्तीफा देना पड़ा। 2016 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा।

रावत को कोर्ट से राहत मिली और वे फिर मुख्यमंत्री बने। 2017 में फिर से राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ। भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत को 18 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री बनाया गया और आज 9 मार्च 2021 को उन्होने इस्तीफा दे दिया है।

निर्भीक नज़र के लिए तारिक अंसारी (न्यूज़ एडिटर) की रिपोर्ट

आज तक रास नहीं आया बीजेपी को सूबे मे सीएम बदलना, आगे देखिये होता है क्या ? (NN स्पेशल)

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Author: nirbhiknazar

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